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सामंतरे पर भारी पड़ी नाफरमानी
वरिष्ठ आईएएस अफसर दिलीप सामंतरे पर राज्य सरकार के आदेश का पालन न करना भारी पड़ गया। इस नाफरमानी पर सरकार ने उसने सामान्य प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी वापस लेते हुए बिना विभाग का अफसर बना दिया। कल सुबह जारी आदेश को देर शाम तक गोपनीय रखा गया। भ्रम फैलने पर इसे सार्वजनिक किया गया।
मामला यूनियन कार्बाइड परिसर में फैले जहरीले कचरे को जर्मनी से जुड़ा है। इस जहरीले कचरे को जर्मनी में नष्ट किया जाना है। इसके पहले राज्य सरकार की ओर से जर्मनी कंपनी से करारनामा किया जाएगा। करारनामा तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सामंतरे की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया। सामंतरे इस जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं थे। घटनाक्रम दो दिन तेजी से बदलता रहा। बताया जाता है कि परसों सामंतरे ने आदेश नहीं लिया तो शाम को यह यह चर्चा रही कि उनके निवास पर जाकर आदेश की तामीली कराई जाए, लेकिन आदेश की तामीली नहीं हो सकी। मुख्य सचिव ने इसे गंभीरता से लिया। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई। अगले दिन सुबह मंत्रालय का काम-काज प्रारंभ होते ही सामंतरे से विभाग की जिम्मेदारी वापस लेने के आदेश दिए। इसी के साथ ही संसदीय कार्य तथा जन शिकायत निवारण विभाग के प्रमुख सचिव सुदेश कुमार को सामान्य प्रशासन विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपने के आदेश दिए गए। मुख्य सचिव के हस्ताक्षर से आनन-फानन में आदेश जारी का पालन हुआ। सामंतरे विभाग के विभाग के अफसर बना दिए गए। इस आदेश को इतना अधिक गोपनीय रखा कि किसी को इसकी कानों कान खबर नहीं हुई। दोपहर होते-होते मंत्रालय में इसकी सुगबुगाहट शुरू हो गई, लेकिन आदेश के प्रति सिर्फ संबंधितों को ही उपलब्ध कराई गई। शाम होते-होते आदेश को लेकर भ्रम फैलने लगा तो देर शाम सरकार ने आदेश सार्वजनिक किया। सुदेश कुमार ने भी विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालते हुए गैस राहत विभाग के अफसरों के साथ औपचारिक चर्चा की। आज सुबह मुख्य सचिव ने भी पूरे मामले की जानकारी ली।

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