Tuesday, May 29, 2012

8:09 PM - No comments

उत्तरांचल से सबक लेगा मध्यप्रदेश

 उत्तराखण्ड में तीर्थयात्रियों से भरी बस पलट जाने से मध्यप्रदेश सरकार सबक लेगी। क्योंकि मध्यप्रदेश सरकार भी प्रदेश के बुजुर्गों को तीर्थयात्रा कराने जा रही है। मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमलीजाना पहनाने के लिए चल रही कयावत में यह भी तय किया गया है कि तीर्थयात्रा पर भेजे जाने वाले बुजुर्गों का बीमा कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही वृद्धजन पंचायत में की गई घोषणाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा हुई। मुख्य सचिव आर परशुराम की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में बताया गया कि वृद्धजन पंचायत में की गई 15 घोषणाओं पर अमल शुरू हो गया है। सीएम की घोषणाओं के अमल पर विस्तार से हुई चर्चा के दौरान एक प्रस्ताव यह भी आया कि चूंकि प्रदेश के वृद्धजनों को प्रदेश सरकार तीर्थयात्रा कराने जा रही है, इसलिए इनकी सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध भी जरूरी है। हाल ही में मध्यप्रदेश के कुछ लोगों द्वारा तीर्थयात्रा पर उत्तरांचल जाने और वहां सड़क दुर्घटना में उनकी मौत का जिक्र भी आया। इस पर यह तय हुआ कि तीर्थयात्रा पर जाने वाले वृद्धजनों का सरकार बीमा कराए। ग्रामीण अंचलों में रहने वाले अंत्योदय परिवार के तथा निराश्रित बुजुर्गों को जो साठ वर्ष से अधिक आयु के होंगे उन्हें साझा चूल्हा कार्यक्रम के तहत नि:शुल्क भोजन उपलब्ध करवाया जायगा। प्रत्येक ग्राम में तीन से पांच बुजुर्गों का ग्राम सभा द्वारा नामांकन किया जायगा जो भोजन की गुणवत्ता तथा निगरानी में मदद करेंगे। प्रत्येक जिले में कम से कम एक और जरूरत के अनुसार एक से अधिक वृद्धाश्रम खोले जायेंगे। इस बारे में भी दिशा निर्देश जारी हो चुके हैं।

प्रतिवर्ष होगा सम्मान समारोह -
बैठक में तय किया गया कि वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान के लिए प्रदेश में राज्य और जिला स्तर पर एक अक्टूबर को सम्मान समारोह होगा। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। यह भी तय किया गया है कि निर्वाचन परिचय-पत्र अब वरिष्ठ नागरिक परिचय-पत्र के रूप में मान्य होंगे। घरों में वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के लिए केयर गिवर्स को प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का निर्धारण कर प्रारंभ किया जाएगा। वरिष्ठ नागरिकों के समग्र कल्याण पर नीति बनाने के लिए वरिष्ठ नागरिक आयोग का गठन करने बावत प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है। इसके साथ ही आदर्श वरिष्ठ नागरिक पुनर्वास नीति तैयार करने का कार्य भी पूर्णता पर है।

Saturday, May 26, 2012

8:52 PM - No comments

सीएस ने दो दिन में नाप लिया प्रदेश

प्रदेश के मुख्य सचिव आर परशुराम ने दो दिन में पूरे प्रदेश को नाप लिया और राजधानी भोपाल लौट आए। सरकारी हैलीकॉप्टर से प्रदेश के दौरे पर गए मुख्य सचिव ने संभागीय मुख्यालयों में समीक्षा बैठकें भी की। मुख्य सचिव बनने के बाद यह उनका पहला हवाई दौरा था। दौरे के दौरान उन्हें ऐसा कुछ नजर नहीं आया जिसमें कहीं कोताही हो रही हो। इतना जरूर हो रहा है कि वे कलेक्टरों, कमिश्नरों की पीठ थपाने के साथ बेहतर काम करने की समझाइश देते जा रहे हैं।
यह पहला मौका नहीं है कि मुख्य सचिव मंत्रालय के एयरकंडीशन चेम्बर से बाहर निकलकर फील्ड में पहुंचें हो। इसके पहले अवनि वैश्य भी मुख्य सचिव रहते हुए प्रदेश के दौरे करते रहे हैं। संभागीय समीक्षा बैठकें भी उन्होंने कीं, हालांकि इनकी हवाईयात्राएं ज्यादा सुर्खियों में रहीं।

अफसरों की पीठ थपथपाई -
इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभाग में समीक्षा बैठकों के दौरान मुख्य सचिव फील्ड में जिम्मेदारी संभाल रहे अफसरों के काम-काज से संतुष्ट नजर आए। इस दौरान उन्होंने कमिश्नर और कलेक्टरों की पीठ थपाने के साथ उन्हें और बेहतर काम करने की सलाह भी दी। समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव का फोकस गेंहू खरीदी पर रहा, क्योंकि गेंहू खरीदी में हुई अफरातफरी के चलते परेशान किसान सड़कों पर आ गए थे। हालांकि अब स्थिति सामान्य है। समीक्षा के दौरान गेंहू खरीदी के मामले में भी मुख्य सचिव संतुष्ट नजर आए। उन्होंने स्वास्थ्य योजनाओं की भी समीक्षा की।

कलेक्टरों को औचक निरीक्षण का खौफ -
मुख्य सचिव के दौरे की खबर लगते ही कलेक्टरो को औचक निरीक्षण का खौफ अधिक रहा, क्योंकि हाल ही में मुख्यमंत्री ने भी प्रदेश के कुछ इलाकों का औचक निरीक्षण कर चुके हैं। ऐसे में कलेक्टर यह सोचकर भयभीत थे कि कहीं मुख्य सचिव उनके इलाके का औचक निरीक्षण न करने लगें, लेकिन ऐसा नहीं होने से उन्होंने राहत की सांस ली।

8:34 PM - No comments

सीनियरिटी लिस्ट तैयार, अब प्रमोशन उलझा

प्रमोशन का इंतजार कर रहे विधानसभा सचिवालय कर्मचारियों को अब ज्यादा इंतजार बर्दाश्त नहीं है। इन्होंने सचिवालय पर दवाब बनाना शुरू कर दिया है, वहीं सचिवालय यह तय नहीं कर पा रहा है कि प्रमोशन में आरक्षण को महत्व दिया जाए या फिर वरिष्ठता को।
विधानसभा सचिवालय अधिकारी-कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची के लिए लम्बे समय से मशक्कत कर रहा था, अब यह मशक्कत पूरी हो चुकी है। अब इसका अंतिम प्रकाशन होना है। वरिष्ठता सूची के प्रकाशन के बाद प्रमोशन की तैयारी है। सचिवालय में जिस गति से काम चल रहा था, उससे यहां के अधिकारी-कर्मचारी आश्वस्त थे कि कि प्रमोशन का इंतजार जल्द समाप्त होगा, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए उन्हें लग रहा है कि अब यह इंतजार और लम्बा होगा। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि क्योंकि आरक्षण मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीमकोर्ट ने मोहर लगाते हुए प्रमोशन में वरिष्ठता को महत्व दिए जाने की बात कही है। यानी प्रमोशन में आरक्षण न देने के निर्देश कोर्ट ने दिए हैं। कोर्ट के इसी आदेश ने सचिवालय की परेशानी बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि सचिवालय अपने स्तर पर कोई निर्णय नहीं ले रहा है। सचिवालय को अब राज्य सरकार के आदेश का इंजतार है। जबकि सरकार ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है।
ऐसा होता रहा है -
विधानसभा सचिवालय ने प्रमोशन के मामले में स्पीकर से अनुमोदन चाहते हुए तर्क दिया था कि चूंकि यहां अमला कम है, काम की अधिकता है इसलिए आरक्षित वर्ग के उम्मीदर न होने पर अन्य वर्ग के लोगों को प्रमोशन देकर रिक्त पदों की पूर्ति कर ली जाए। जब आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार होंगे तो उन्हें प्राथमिकता से मौका देते हुए आरक्षण की पूर्ति कर ली जाएगी। पूर्व में यह होता भी रहा है, सरकार का यह नियम भी है, लेकिन स्पीकर ने इस प्रस्ताव को अमान्य कर दिया।
एक हफ्ते से पीएस के यहां फाइल -
अधिकारी-कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची की फाइल विधानसभा प्रमुख सचिव के यहां एक हफ्ते से पड़ी है, लेकिन प्रमुख सचिव इसका अध्ययन नहीं कर पाए। वरिष्ठ सूची तैयार करने का कार्य पूरा होने की सूचना मिलते ही विधानसभा अधिकारी-कर्मचारियों ने अब वरिष्ठता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाकर प्रमोशन के लिए दवाब बनाना शुरू कर दिया है। तर्क है कि सचिवालय चाहे तो पुराने नियम के आधार माने या फिर कोर्ट के नए निर्देशों का पालन करते हुए प्रमोशन करे।

Thursday, May 24, 2012

7:31 AM - No comments

IAS राजौरा की खुलेगी फाइल

 निलंबित आईएएस अधिकारी राजेश राजौरा की फाइल फिर से खुलने जा रही है। सरकार इनके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच करने जा रही है। मालूम हो आयकर कार्रवाई के दौरान इनके यहां आकूत दौलत मिलने के बाद राज्य सरकार ने इन्हें निलंबित कर दिया था, तभी से ये निलंबित चल रहे हैं। राजेश राजौरा के यहां आयकर कार्रवाई के दौरान आयकर अफसरों को नगद राशि तो बहुत ही कम मिली, लेकिन उनके यहां मिले अचल संपत्ति के दस्तावेज देखकर उनकी आंखी फटी की फटी रह गर्इं। उन्होंने प्रदेश सहित प्रदेश के बाहर कई जगह जमीन इत्यादि में इंवेस्ट किया था। आयकर विभाग ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी तो सरकार ने राजौरा को निलंबित कर दिया। हालांकि निलंबन के विरोध में ये कैट में भी गए। इन्होंने सरकार के निर्णय को चुनौती देते हुए निलंबन को अनुचित बताया था। मामला कैट में होने के कारण सरकार इनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू नहीं कर पाई। हाल ही में इन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली है। राज्य को इसकी सूचना मिल गई है। इसलिए सरकार अब विभागीय जांच कराए जाने को स्वतंत्र है। सरकार ने राजौरा से जुड़े मामले की फाइलें खंगालना शुरू कर दी है।
हाल ही में बढ़ी है निलंबन अवधि : 24 फरवरी 2010 से निलंबित चल रहे आईएएस अधिकारी राजेश राजौरा की हाल ही में निलंबन अवधि बढ़ाई जा चुकी है। अब इनकी निलंबन अवधि छह माह के लिए बढ़ाई गई है। यानी जांच पूरी होने तक ये निलंबित रहेंगे।
पूर्व मुख्य सचिव करेंगी जांच : राजौरा के खिलाफ विभागीय जांच की जिम्मेदारी पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच को सौंपी गई है। मालूम हो राजौरा के निलंबन के साथ ही राज्य सरकार ने विभागीय जांच के लिए जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया था, लेकिन मामला कैट में होने के कारण जांच रुकी थी।

Sunday, May 20, 2012

6:49 AM - No comments

कमाल का है कलेक्टरों का खुफिया तंत्र

प्रदेश के औचक निरीक्षण पर निकले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कार्यक्रम भले ही गोपनीय रहा हो, लेकिन कलेक्टरों का सूचना तंत्र कमाल का रहा। यानी सीएम के पहुंचने के पहले कलेक्टरों को सूचना मिलती रही और वे सक्रिय रहे। लेकिन यह भी  सही है कि औचक निरीक्षण की सूचना मात्र ने कलेक्टरों के होश उड़ा रखे हैं।
यह बात सही है कि जिलों में कलेक्टरों का अपना नेटवर्क होता है, वे अपने स्तर पर खुफिया जानकारी भी जुटाते हैं, लेकिन यह बात समझ से बाहर रही कि जब किसान उग्र हुए, सड़कों पर आ गए तो फिर कलेक्टरों का यह सूचना तंत्र कहां गया। इससे दो सवाल खड़े होते हैं एक या तो कलेक्टरों को इसकी भनक नहीं थी, दूसरा यह कलेक्टरों को अंदाजा था कि ऐसा होगा फिर भी उन्होंने सरकार को इसकी सूचना नहीं दी। यदि जानकारी होते हुए सरकार को सूचना नहीं दी तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। किसानों को एसएमएस कर मण्डी बुला लिया गया, गेंहू लिए किसान मण्डी में रात-रात भर खड़े रहे लेकिन वारदानों की कमी बताकर उनका गेंहू नहीं खरीदा गया तो किसानों का गुस्सा बढ़ने लगा। मण्डी में पड़ा गेंहू सड़ने लगा तो किसान सड़कों पर आ गए, तब सरकार सक्रिय हुई। इस बीच बिचौलिए भी सक्रिए हो गए। हालांकि मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को फ्री हैण्ड देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि गड़बड़ी करने वालों को जेल में डाल दो। कार्यवाही करने से मत चूको। कलेक्टरों ने कार्यवाही शुरू की, लेकिन मुख्यमंत्री ने मौके पर जाकर स्वयं स्थिति को देखने का तय किया और औचक निरीक्षण का कार्यक्रम तैयार हो गया।

देखते ही बनी कलेक्टरों की सक्रियता -
शुक्रवार को मुख्यमंत्री के औचक निरीक्षण की खबर आग की तरह फैली। कलेक्टर सुबह से ही सक्रिय थे। राजधानी भोपाल से वे लगातार मुख्यमंत्री की लोकेशन लेते रहे। हालांकि सीएम का कार्यक्रम गोपनीय था, इसलिए उन्हें सचिवालय से ज्यादा सफलता तो नहीं मिली तो कुछ कलेक्टरों ने अपने मीडिया मित्रों सहित अन्य लोगों का सहारा लिया। स्थिति यह रही कि सीएम के पहुंचने के पहले उन्हें सूचनाएं मिलती रहीं और कलेक्टर सीएम की आगवानी में खड़े नजर आए।

कलेक्टरों का टेस्ट, रिजल्ट 31 के बाद -
प्रदेश के औचक निरीक्षण पर निकले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कलेक्टरों का रिपोर्टकार्ड खुद तैयार कर रहे हैं। यह कलेक्टरों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है। इस परीक्षा का परिणाम 31 मई के बाद उजागर होगा। यानी जिसका काम अच्छा होगा कलेक्टरी बची रहेगी, अन्यथा वापस बुला लिया जाएगा।

Friday, May 18, 2012

8:08 AM - No comments

IAS मधुरानी का बदलेगा कॉडर, सरकार सहमत

आईपीएस पति की मौत से दु:खी आईएएस अधिकारी मधुरानी को कॉडर बदलने की अनुमति मिल गई है। मुख्यमंत्री ने इनकी फाइल ओके कर दी है, अब प्रदेश सरकार अपनी टिप्पणी के साथ इनके आवेदन को कार्मिक मंत्रालय भेजेगी।
आईपीएस पति नरेन्द्र कुमार की मौत पर आईएएस अधिकारी मधुरानी ने यह कहकर सनसनी मचा दी थी कि खनिज माफिया ने उनके पति की हत्या करवा दी, क्योंकि उन्होंने खनिज माफिया के खिलाफ लम्बे समय से अभियान छेड़ रखा था। आईपीएस बेटे की मौत से दु:खी उनके पिता केशव देव ने एक कदम आगे बढ़कर यहां तक कह दिया कि मध्यप्रदेश में उनकी आईएएस बहु को जान का खतरा है, क्योंकि मध्यप्रदेश सरकार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया नहीं करवा पा रही है। इसी के कुछ दिनों बाद ही मधुरानी ने प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर कॉडर बदलने का आग्रह किया था। हालांकि पत्र में उन्होंने तर्क दिया था कि चूंकि उनकी ससुराल उत्तर प्रदेश में है, सभी परिजन वहीं रहते हैं, इसलिए मैं उत्तर प्रदेश में सेवाएं देना चाहती हूं, इसलिए मेरा कॉडर उत्तर प्रदेश का दिया जाए। मालूम हो मूलत: दिल्ली निवासी मधुरानी के पिता दिल्ली में निवारत हैं। और वहां से दिल्ली दूर नहीं है।

असमंजस में रही सरकार -
मधुरानी के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उसे प्रदेश की बेटी बताते हुए कहा था कि उन्हें मध्यप्रदेश में पूरी सुरक्षा दी जाएगी। वे मध्यप्रदेश में ही सेवाएं दे, हालांकि मुख्यमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया था कि यदि प्रदेश के बाहर सेवाएं देना चाहतीं हैं तो प्रदेश सरकार इनमें बाधा नहीं बनेगी। लेकिन मधुरानी का पत्र आने के बाद के बाद सरकार असमंजस में रही कि यदि उन्हें कॉडर बदलने की अनुमति दी गई तो यह संदेश जाएगा कि प्रदेश सरकार उन्हें सुरक्षा नहीं दे पा रही है और यदि अनुमति नहीं दी जाती तो कहा जाएगा कि सरकार आईपीएस की विधवा महिला आईएएस को अकारण परेशान कर रही है।

सीएम ने इच्छा पूरी की -
लम्बे समय से प्रदेश के दौरों और फिर विभागीय समीक्षाओं से समय मिलते ही मुख्यमंत्री ने मधुरानी की फाइल बुलाई, अफसरों से विचार विमर्श के बाद सीएम ने उनकी फाइल ओके कर दी।

Thursday, May 17, 2012

12:38 AM - No comments

सेमीफाइनल से पहले हाथ पांव फूले सरकार के

प्रदेश में विधानसभा के आम चुनाव भले ही अगले वर्ष होना है, लेकिन इसी वर्ष होने प्रस्तावित मण्डी और नगरीय निकाय चुनाव के नाम से ही भाजपा सरकार के हाथपांव फूले हैं,क्योंकि किसानों ने सरकार खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। ऐसे में प्रयास यही है कि चुनाव अभी न हों।
प्रदेश में जिस तरह से किसान सरकार के खिलाफ खड़े हैं, इससे सरकार नहीं चाहती है कि अभी कोई चुनाव हों। हालांकि सत्तारूढ़ दल भाजपा और प्रदेश सरकार यह बताने का प्रयास कर रही है कि वे किसान विरोधी नहीं हैं। गेंहू की बम्पर पैदावार होने के बाद सरकार खरीदी में लेतलाली कर रही है। गेंहू सड़ रहा है, लेकिन खरीदी न होने के कारण नाराजगी बढ़ी है। जिस तरह किसानों पर लाठीचार्ज हुआ, मुकदमा दर्ज कर जेल में डाला गया, उससे किसान सरकार के खिलाफ खड़े हो गए हैं। लेकिन मजबूरी यह है कि जून तक प्रदेश में मण्डी चुनाव होना है। अब बीच का रास्ता निकाले जाने के लिए मंथन हो रहा है। मालूम हो मण्डी चुनावों में किसानों का अहम रोल रहता है।
मण्डी चुनाव की तरह प्रदेश के 16 जिलों की 53 नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों में भी चुनाव होना है। इन चुनावों को भी कोर्ट के निर्देश पर कराया जा रहा है। इन चुनावों में ग्रामीण मतदाता ही शामिल हैं। राज्य निर्वाचन आयोग को ये चुनाव कराना है, इसके लिए निर्वाचन नामावलियों का काम पूरा हो चुका है, लेकिन आयोग ने अभी तक चुनाव तिथि घोषित नहीं की है। इस संबंध में आयोग के अफसर कुछ भी बोलने से कतराते हैं।

आम चुनाव का सेमीफानल -
नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों, मण्डी चुनाव विधानसभा के सेमीफाइनल ही हैं। इन चुनावो ंके परिणामों से इस बात का अंदाजा लगाना आसान हो जाएगा कि भाजपा राज्य में तीसरी बार सरकार बनाएगी या नहीं। सत्तारूढ़ दल भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने स्तर पर तैयारी में जुटे हैं। दौरों और यात्राओं का दौर चल रहा है, लेकिन इसमें किसे कितनी सफलता मिलती है यह तो वक्त आने पर ही पता चलेगा, लेकिन सत्तारूढ़ दल अभी चुनाव नहीं चाहता जबकि कांग्रेस अपने लिए अच्छा माहौल मान रही है।

ऐसा भी हो रहा है -
वर्तमान व्यवस्था के तहत मण्डी अध्यक्ष का चुनाव सीधे होता है, लेकिन सरकार ने एक्ट में परिवर्तन करते हुए अध्यक्ष का चुनाव सीधे न कर सदस्यों से चुने जाने का प्रावधान कर दिया है। कैबिनेट से हरीझण्डी मिल चुकी है। कैबिनेट के निर्णय पर अमल तब होगा जब राज्यपाल की हरीझंडी मिल जाएगी। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस कैबिनेट के इस निर्णय के खिलाफ है। तर्क दिया जा रहा है कि सत्तारूढ़ दल सत्ता के दम पर सभी मण्डियों में अपने अध्यक्ष पदस्थ करवा देगी।