Wednesday, May 9, 2012

8:30 PM - No comments

अफसर बोले : आल इज वेल

बारदानों को लेकर प्रदेश में भले ही हाहाकार मचा हो, किसान सड़कों पर आ गए हों, लेकिन अफसरशाही सब कुछ ठीक-ठाक मानती है। कलेक्टर अपने संभागों के कमिश्नरों को और कमिश्नर मुख्य सचिव को कुछ ऐसी ही रिपोर्ट दे रहे हैं। एयरकंडीशन चेम्बर में बैठकर हो रही समीक्षाओं में भी फीलगुड ही हो रहा है।
मंत्रालय से लेकर फील्ड में बैठे अफसर सभी ओके रिपोर्ट देते रहे, आश्चर्य यह रहा कि फील्ड से आ रही रिपोर्ट को किसी भी जिम्मेदार अफसर ने क्रॉस चैक करने की जहमत नहीं उठाई। हालात बिगड़ते गए और स्थिति सामने है। कल आनन-फानन में मुख्य सचिव ने मंत्रालय में बैठकर कमिश्नरों से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से चर्चा कर जमीनी हकीकत जानने का प्रयास किया। ज्यादातर कमिश्नरों ने स्थिति को बेहतर बताया। एक ओर सरकार दिल्ली तक बारदानों की कमी का रोना रो रही है, वहीं कलेक्टर कहते हैं कि कमी अब दूर हो रही है। हालांकि मुख्य सचिव ने स्थिति को भांपते हुए सभी कलेक्टरों और कमिश्नरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यही मौका है जब उन्हें प्रशासनिक नेतृत्व क्षमता को दिखाते हुए चुनौतियों का सामना करना है।

चीफ सेके्रटरी को कमिश्नरों ने यह दी रिपोर्ट -

सागर कमिश्नर आर के माथुर -
संभाग में बारदानों की कमी नहीं है। गेंहू भण्डारण की पूरी व्यवस्था है।

जबलपुर कमिश्नर दीपक खाण्डेकर -
संभाग में बारदाना की कोई कमी नहीं है। पश्चिम बंगाल एवं छत्तीसगढ़ से बारदानों की आपूर्ति हुई है।

भोपाल कमिश्नर प्रवीण गर्ग -
इटारसी एवं मण्डीदीप में बारदानों के रेक पहुंच जाने से काफी आसानी हुई है। संभाग में स्थिति बेहतर है।

होशंगाबाद कमिश्नर अरुण तिवारी -
संभाग में उपार्जन कार्य देर से शुरू हुआ। मई माह के अंत तक सुचारू रूप से खरीदी की व्यवस्था कर ली गई है।

ग्वालियर कमिश्नर एसबी सिंह -
बारदानों की कमी दूर हुई है। प्लास्टिक बैग भी पहुंचने लगे हैं।

चंबल कमिश्नर अशोक शिवहरे -
गेंहू खरीदी सुचारू चल रही है। खरीदी में कहीं कोई बाधा नहीं है।

उज्जैन कमिश्नर अरुण पाण्डे -
गेहंू उपार्जन कार्य सुचारू चल रहा है। मण्डी तक आने वाले किसानों से खरीदी हो रही है।

इंदौर कमिश्नर पीके पाराशर -
विक्रम नगर में तीन हजार गठानों के मिलने से आसानी हुई। धार जिले के लिए आवश्यकतानुसार अधिक बारदाना की व्यवस्था की गई है।

शहडोल कमिश्नर प्रदीप खरे -
गेंहू खरीदी में कहीं कोई बाधा नहीं है। काम-काम सुचारू ढंग से चल रहा है।

रीवा कलेक्टर शिवनारायण रुपला -
कमिश्नर टी धर्माराव की अनुपस्थिति में कलेक्टर शिवनारायण रुपला ने बताया कि सतना जिले में बारदानों की कुछ कमी अनुभव की गई है।

Tuesday, May 8, 2012

6:46 AM - No comments

31 तक नहीं होंगे कलेक्टरों के तबादले

कलेक्टरी छिनने का तनाव झेल रहे आईएएस अफसरों के लिए यह राहत भरी खबर हो सकती है क्योंकि इस महीने किसी भी कलेक्टर का तबादला नहीं होगा। गेंहू खरीदी को लेकर प्रदेश में बने हालातों को देखते हुए ऐसा निर्णय लिया गया है। यानी जब तक गेंहू खरीदी होती रहेगी अफसरों की कलेक्टरी सुरक्षित रहेगी।
इसी माह की एक तारीख को आर परशुराम द्वारा मुख्य सचिव पद की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही आईएएस अफसरों के तबादलों की अटकलें शुरू हो गई थीं। तर्क दिया जा रहा था कि एक हफ्ते में परशुराम अपनी टीम तैयार कर लेंगे, लेकिन हालातों को देखते हुए ऐसा नहीं हुआ। हालांकि यह तय है कि टीम परशुराम जब भी बनेगी बहुत ताकतवर होगी। मुख्यमंत्री भी यही चाहते हैं कि फील्ड में अब ऐसे अफसरों को पदस्थ किया जाए तो जिन्हें आगामी विधानसभा चुनाव तक न हटाना पड़े। जाहिर है ऐसे अफसरों की पदस्थापना बदली जाएगी, जिन्हें एक ही जिले में तीन वर्ष हो गए हैं या फिर अगले वर्ष तीन साल पूरे हो जाएंगे। इस क्राइट एरिया में आए अफसरों की सूची तैयार कर ली गई है। लेकिन अभी इनकी पदस्थापना के मामले में अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
इन जिलों को मिलेंगे नए कलेक्टर -
प्रदेश के तीन जिले ऐसे हैं जहां नए कलेक्टर मिलना तय है। इनमें सागर, शाजापुर और श्योपुर जिला शामिल है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि शाजापुर कलेक्टर सोनाली वायंगणकर और श्योपुर कलेक्टर ज्ञानेश्वर पाटिल ने मध्यप्रदेश में सेवाएं न देने का निर्णय लेते हुए महाराष्ट्र कॉडर मांगा है। इसी प्रकार सागर कलेक्टर इ. रमेश कुमार आंध प्रदेश कॉडर में जाना चाहते हैं। इन अफसरों के आवेदनों पर विचार हो रहा है।
अफसरों में सक्रियता -
यह तो तय है कि प्रदेश में किसानों से गेंहू खरीदी तक कलेक्टरों के तबादले नहीं होंगे। इसके पहले गेंहू खरीदी 20 मई तक होना थी, इसके बाद कलेक्टरों के तबादले होना थे, लेकिन अब यह तिथि बढ़ाकर 31 मई कर दिए जाने से अफसरों ने राहत की सांस तो ली है, लेकिन उनकी सक्रियता में कोई कमी नहीं आई है। लम्बे समय से जो कलेक्टरी का सुख भोग रहे हैं वे कलेक्टरी छोड़ना नहीं चाहते, तीन वर्ष के क्राइट एरिया में आने वाले अफसरों का प्रयास है कि उन्हें नए जिले की जिम्मेदारी मिल जाए। जो अफसर कलेक्टरी सुख से वंचित हैं वे ज्यादा सक्रिय हैं। इसके लिए वे राजनैतिक संबंधों का भी इस्तेमाल करने में भी परहेज नहीं बरत रहे हैं।

Monday, May 7, 2012

12:31 AM - No comments

दादा रोहाणी ने निभाई तिवारी परम्परा

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों का विवाद चल ही रहा था अब वर्तमान अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों पर भी उंगलियां उठाई जाने लगी हैं। विधानसभा सचिवालय में ऐसी नियुक्तियों की संख्या 175 है। इनमें करीब 25 नियुक्तियां इसी कार्यकाल की हैं। अब निर्णय कोर्ट को करना है। सुनवाई इसी माह की 19 तारीख को हाईकोर्ट में होना है। क्योंकि अपीलकर्ता ने सचिवालय के निर्णय को चुनौती देते हुए कहा था कि नियमों को दरकिनार कर नियुक्त किए गए सभी की नियुक्ति अवैध घोषित की जाए। इसी के जवाब में सचिवालय ने कोर्ट को यह जवाब पेश कर दिया। ऐसे में वर्तमान नियुक्तियां भी जांच के दायरे में आ गई।

12:31 AM - No comments

डीपीसी हुई अब प्रमोशन का इंतजार

एडीजी से डीजी के पद पर प्रमोशन के लिए डीपीसी हुए लम्बा अंतराल बीत जाने के बाद भी प्रमोशन नहीं होने पर आईपीएस अफसरों में सक्रियता बढ़ी है। मालूम हो राज्य में पुलिस महानिदेशक (डीजी) के तीन और इतने ही एक्स कॉडर के पद हैं। इसमें एक पद खाली है, जबकि दो पद इसी वर्ष रिक्त हो रहे हैं। रिक्त पद होमगार्ड डीजी का कॉडर है, जबकि मानव अधिकार आयोग के डीजी एचके सरीन इसी वर्ष जून में और पीएचक्यू में ओएसडी वीएम कंवर सितम्बर माह में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। हाल ही में अरोरा को होमगार्ड डीजी का प्रभार दिया जा चुका जबकि सुरेन्द्र सिंह की जिम्मेदारी मिली है। डीपीसी में 1979 से 1981 बैच के आईपीएस अफसरों के नामों पर विचार हुआ। इनमें 1979 बैच के आरसी अरोरा, 1980 बैच के सुरेन्द्र सिंह, 1981 बैच के एके धस्माना और डॉ. आनंद कुमार, 1982 बैच के एसएस लाल प्रमुख हैं। 1981 बैच के दोनों अफसर केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। इसलिए एसएस लाल सहित आरसी अरोरा और सुरेन्द्र सिंह का प्रमोशन तय है।

12:30 AM - No comments

फिर सुर्खियों में जोशी दम्पत्ति

मध्यप्रदेश कॉडर के आईएएस अधिकारी अरविन्द जोशी और टीनू जोशी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। आयकर कार्यवाही के दौरान इनके निवास से आकूत दौलत मिलने के बाद राज्य सरकार ने इन्हें निलंबित कर दिया है। अब हाल ही में इन्हें बर्खास्त किए जाने की सिफारिश भी केन्द्र सरकार को कर दी गई। प्रदेश के इतिहास में शायद यह पहला मामला है कि किसी आईएएस दम्पत्ति को बर्खास्त किए जाने की सिफारिश की गई हो। प्रदेश सरकार द्वारा जोशी दम्पत्ति को बर्खास्त किए जाने के बाद अब गेंद केन्द्र के पाले में है, क्योंकि अखिल भारतीय सेवा अफसरों की सेवाएं केन्द्र में होती हैं। अब निर्णय केन्द्र को ही लेना है। केन्द्र इनकी बर्खास्ती पर मोहर लगाएगा इसके बाद राज्य सरकार औपचारिक आदेश जारी करेगी।
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12:25 AM - No comments

कलेक्टर को भारी पड़ा सरकार से पंगा


सरकार को चुनौती देने वाले आईएएस अफसर नवनीत मोहन कोठारी को अब जेब ढीली करना होगी। मामला दो सरकारी मकानों पर कब्जा जमाने से जुड़ा है।
बालाघाट कलेक्टर रहे कोठारी की कुछ समय के लिए भोपाल में पदस्थापना हुई थी। उस दौरान इन्हें निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में पदस्थ किया गया था। उसी समय इन्हें भोपाल के चार इमली स्थित डी 3/2 बंगला आवंटित हुआ था, लेकिन कुछ समय बाद ही इन्हें खरगौन जिले की कलेक्टरी मिल गई। इन्होंने खरगौन में ज्वाइन तो कर लिया लेकिन भोपाल का बंगला नहीं छोड़ा। संपदा संचालनालय ने इन्हें बंगला खाली करने के लिए कई नोटिस भी भेजे लेकिन इन्हें बंगला खाली करने के बजाय कोर्ट की शरण ली। सरकार ने कोर्ट को बताया कि नियमानुसार एक व्यक्ति को एक ही सरकारी मकान की पात्रता होती है, चूंकि कोठारी खरगोन कलेक्टर हैं, उन्हें वहां सरकारी मकान आवंटित है इसलिए उन्हें भोपाल का मकान खाली करना होगा। भोपाल में सरकारी मकान के इसलिए भी पात्र नहीं हैं क्योंकि इनकी पदस्थापना भोपाल शहर में नहीं है।
दो माह के लिए मिली थी अनुमति -
10 सितम्बर 2011 को खरगोन कलेक्टर बनाए गए कोठारी को दो माह के लिए भोपाल में सरकारी मकान की अनुमति थी। इसके बाद इन्होंने यह अवधि और बढ़ाए जाने का आवेदन किया लेकिन सरकार ने उनका आवेदन खारिज करते हुए मकान खाली करने का आदेश दिया।
बाजार दर से होगी बसूली -
कोठारी से अब राज्य सरकार बाजार दर से मकान किराया बसूलने की तैयारी कर रही है। इसके लिए उनकी फाइल खंगाली जा रही है। हिसाब-किताब तैयार होते ही उन्हें वसूली का नोटिस जारी किया जाएगा।

12:21 AM - No comments

सीएस से दो गुना अधिक होगा पायलट का वेतन

मुख्यमंत्री के विमान बेड़े में शामिल हवाई जहाज और हैलीकॉप्टर के पायलटों, इंजीनयरों को दोगुना वेतन मिलेगा। यह चीफ सेके्रटरी के वेतन से ढाई गुना अधिक होगा। वेतनभत्तों के मामले में गठित कमेटी ने यह अनुशंसा मुख्यमंत्री को भेज दी है।
पायलट और इंजीनियर लम्बे समय से सरकार पर दवाब बना रहे थे कि निजी विमानन सेवाओं की तुलना में उनके वेतनभत्ते कम हैं। मामला मुख्यमंत्री के हवाईबेड़े से जुड़ा होने के कारण सरकार भी सक्रिय हुई। इसके लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया गया। कमेटी ने मंथन के बाद वित्त विभाग को अनुशंसा भेज दी थी। वित्त विभाग की सहमति के बाद सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री के पास फाइल भेज दी गई है। मुख्यमंत्री की हरीझंडी मिलते ही पायलट और इंजीनियरों को बढ़े हुए वेतन-भत्ते मिलने लगेंगे। यह उनको वर्तमान में मिल रहे वेतन से दोगुना होगा।

पैकेज में शामिल होंगी सभी सुविधाएं -
कमेटी ने अनुबंध में कार्यरत पायलट और इंजीनियरों के पैकेज में बढ़ोत्तरी करते हुए दोगुना करने की अनुशंसा की है। इनको अब अलग से मकान किराया, वाहन भत्ता सहित अन्य सुविधाएं नहीं मिलेंगी। यानी यह सब पैकेज में शामिल होगा। जबकि नियमित पायलट और इंजीनियरों के मामले में ऐसा नहीं होगा। उनका वेतन तो यथावत रहेगा, लेकिन भत्ते बढ़ जाएंगे, जिससे उनको मिलने वाली तनख्वाह अनुबंधितों से समान हो जाए।

यह है पायलटों का वेतन -
चीफ पायलट अनंत सेठी को वेतनभत्ता मिलाकर करीब ढाई लाख रुपया मिलता है, जबकि पायलटों को करीब डेढ़ लाख रुपया मिलता है। अनुबंधित पायलटों के लिए चार स्लैब एक लाख, 1.50 लाख, 1.75 लाख और 1.90 लाख रुपया मिलता है। अनुबंधित पायलटों का वेतन अब दोगुना हो जाएगा। यानी इन्हें क्रमश: 2 लाख, 3 लाख, 3.50 लाख, 3.80 लाख रुपया प्रतिमाह वेतन मिलेगा। नियमित पायलटों के भत्तों में इजाफा होगा।

यह है मुख्य सचिव का वेतन -
मुख्य सचिव को 80 हजार रूपए बेसिक पे के साथ डीए, ग्रेड पे व अन्य भत्ते मिला कर करीब डेढ़ लाख रूपए प्रतिमाह वेतन के रूप में मिलते हैं। प्रदेश में भारतीय पुलिस सेवा के सर्वोच्च अधिकारी डीजीपी और भारतीय वन सेवा के एक प्रमुख अधिकारी को भी मुख्य सचिव के समान बेसिक वेतन, ग्रेड पे और डीए व अन्य भत्ते दिए जाते हैं।