Saturday, July 14, 2012

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सामंतरे पर भारी पड़ी नाफरमानी


वरिष्ठ आईएएस अफसर दिलीप सामंतरे पर राज्य सरकार के आदेश का पालन न करना भारी पड़ गया। इस नाफरमानी पर सरकार ने उसने सामान्य प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी वापस लेते हुए बिना विभाग का अफसर बना दिया। कल सुबह जारी आदेश को देर शाम तक गोपनीय रखा गया। भ्रम फैलने पर इसे सार्वजनिक किया गया।
मामला यूनियन कार्बाइड परिसर में फैले जहरीले कचरे को जर्मनी से जुड़ा है। इस जहरीले कचरे को जर्मनी में नष्ट किया जाना है। इसके पहले राज्य सरकार की ओर से जर्मनी कंपनी से करारनामा किया जाएगा। करारनामा तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सामंतरे की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया। सामंतरे इस जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं थे। घटनाक्रम दो दिन तेजी से बदलता रहा। बताया जाता है कि परसों सामंतरे ने आदेश नहीं लिया तो शाम को यह यह चर्चा रही कि उनके निवास पर जाकर आदेश की तामीली कराई जाए, लेकिन आदेश की तामीली नहीं हो सकी। मुख्य सचिव ने इसे गंभीरता से लिया। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई। अगले दिन सुबह मंत्रालय का काम-काज प्रारंभ होते ही सामंतरे से विभाग की जिम्मेदारी वापस लेने के आदेश दिए। इसी के साथ ही संसदीय कार्य तथा जन शिकायत निवारण विभाग के प्रमुख सचिव सुदेश कुमार को सामान्य प्रशासन विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपने के आदेश दिए गए। मुख्य सचिव के हस्ताक्षर से आनन-फानन में आदेश जारी का पालन हुआ। सामंतरे विभाग के विभाग के अफसर बना दिए गए। इस आदेश को इतना अधिक गोपनीय रखा कि किसी को इसकी कानों कान खबर नहीं हुई। दोपहर होते-होते मंत्रालय में इसकी सुगबुगाहट शुरू हो गई, लेकिन आदेश के प्रति सिर्फ संबंधितों को ही उपलब्ध कराई गई। शाम होते-होते आदेश को लेकर भ्रम फैलने लगा तो देर शाम सरकार ने आदेश सार्वजनिक किया। सुदेश कुमार ने भी विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालते हुए गैस राहत विभाग के अफसरों के साथ औपचारिक चर्चा की। आज सुबह मुख्य सचिव ने भी पूरे मामले की जानकारी ली।

10:24 PM - No comments

दागी नौकरशाहों को माफी ...!


मनरेगा के दागी दो नौकरशाहों सुखवीर सिंह और चंद्रशेखर बोरकर को अब राज्य सरकार माफ करने की तैयारी में है। तर्क दिया जा रहा है कि युवा अफसरों से जोश में गलती होना स्वभाविक है, गलती जानबूझकर नहीं हुई।
मामला वर्षों पुराना है, जब सुखबीर सिंह सीधी जिले के कलेक्टर थे और चंद्रशेखर बोरकर उसी जिले के सीईओ थे। आरोप हैं कि इन्होंने वहां जैट्रोफा के पौधों को ढाई करोड़ के इंजेक्शन लगवा दिए। तर्क दिया गया कि इन हार्मोन के इंजेक्शन से पौधे तेजी से बढ़ने लगेंगे। आरोप यह भी रहा कि इन्होंने जेट्रोफा बीज की सप्लाई, पौधों की खाद, कीटनाशक दवाओं और ग्रोथ हार्मोस के छिड़काव का काम एकमात्र फर्म ओम सांई बायोटेक, रीवा से कराया और भुगतान स्व-सहायता समूहों से करवाया। जबकि कंपनी के पास न तो टिन नंबर है और न ही रासायनिक दवा बेचने का पंजीयन। मामले की जांच में प्रथम दृष्टया में इन दोनों अफसरों को दोषी पाया गया। इसके बाद भी इन पर कार्यवाही नहीं हुई। चूंकि मामला पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ा है, इसलिए विभाग सरकार को लगातार कहता रहा कि दोषी अफसरों पर कार्यवाही की जाए, लेकिन इन पर कार्यवाही तो दूर इन्हें लगातार बेहतर पोस्टिंग मिलती रही। बोरकर तो वर्ष 2002 से लगातार कलेक्टरी कर रहे हैं। सुखवीर सिंह की भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही है।
सदन में हुई गूंज -
पौधों को हार्मोन के इंजेक्शन लगाए जाने की गूंज पिछले मानसून सत्र में भी हुई। दोषी अफसरों को बचाए जाने का आरोप लगाते हुए विपक्षी दल के सदस्यों ने सरकार को घेरने का प्रयास किया। उस दौरान पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने सदन को जानकारी दी थी कि अफसर जांच में दोषी पाए गए हैं, कार्यवाही करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को लिखा गया है। तभी से यह फाइल मंत्रालय में धूल खा रही थी।
प्रभावी अफसर हैं -
ये दोनों युवा आईएएस अफसर नौकरशाहों में काफी प्रभावी माने जाते हैं। सुखवीर सिंह भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के रिश्तेदार हैं, जबकि बोरकर सेवानिवृत्त आईएएस अफसर के दामाद हैं।

10:23 PM - No comments

नहीं खुल सकी आईएएस राजौरा की फाइल


मध्यप्रदेश कॉडर में 1990 बैच के आईएएस अफसर राजेश राजौरा की फाइल खुलने का रास्ता साफ होने के बाद भी सरकार ऐसा नहीं कर पा रही है। लम्बे समय से निलंबन का बोझ झेल रहे राजौरा भी चाहते हैं कि उनके मामले में सरकार शीघ्र निर्णय ले, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।
गृह सचिव रहते हुए करीब तीन वर्ष पूर्व आयकर छापे के दौरान इनके यहां आय से अधिक सम्पत्ति और करोड़ों रुपए की अचल सम्पत्ति के दस्तावेज मिलने के बाद से राज्य सरकार ने इन्हें निलंबित कर दिया था। आरोप था कि स्वास्थ्य विभाग के सचिव रहते हुए इन्होंने करोड़ों रुपए की दौलत कमाई। छापे की कार्यवाही के बाद आयकर विभाग ने जो रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी उसमें इसका विस्तृत भी दिया। निलंबन के बाद राज्य सरकार ने इनके खिलाफ विभागीय जांच की कार्यवाही भी शुरू की। सेवानिवृत्त मुख्य सचिव श्रीमती निर्मला बुच को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। विभागीय जांच शुरू होती इसके पहले ही ये सेंट्रल एडमिनिस्टेÑटिव ट्रिव्युनल (कैट) चले गए। कैट में इन्होंने सरकार की कार्यवाही को चुनौती दी। कोर्ट ने सरकार की कार्यवाही पर स्थगन देते हुए इन्हें राहत दी, इससे विभागीय जांच तो शुरू नहीं हो सकी, लेकिन इनकी बहाली नहीं हुई। सूत्रों का कहना है कि 24 फरवरी 2010 से निलंबित चल राजौरा ने बहाली के अनेक प्रयास किए लेकिन इन्हें सफलता नहीं मिल सकी। निलंबित चलने के कारण इनको प्रमोशन इत्यादि के लाभ भी नहीं मिल पा रहे थे, आखिरकार इन्होंने कैट से याचिका वापस ले ली। राज्य सरकार को पिछले माह इसकी सूचना भी मिल चुकी है, यानी सरकार अब विभागीय जांच कराए जाने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन अभी तक जांच शुरू नहीं हो पाई है।
यह करना है सरकार को -
चूंकि राज्य सरकार विभागीय जांच के लिए जांच अधिकारी तो पहले ही नियुक्त कर चुकी है। चूंकि जांच शुरू होने के पहले ही कैट का स्थगन मिल गया था। इसलिए अब सरकार को चाहिए कि वह जांच अधिकारी को पत्र लिखकर विभागीय जांच शुरू करने के लिए कहे, लेकिन डेढ़ माह बाद भी सरकार जांच अधिकारी को पत्र नहीं लिख सकी है।

10:22 PM - No comments

मध्यप्रदेश आईएएस में 1974 बैच खत्म


पिछले माह जून में प्रदेश के दो वरिष्ठतम आईएएस अफसरों के सेवानिवृत्त होते ही प्रदेश में 1974 बैच खत्म हो गया। मध्यप्रदेश कॉडर में 1974 बैच में कुल चार आईएएस अफसर शामिल थे। इनमें अलका सिरोही सबसे सीनियर थीं। ये पूर्व में ही सेवानिवृत्त हो चुकीं हैं, जबकि सीनियरिटी में अगले नम्बर पर के एम आचार्य और रंजना चौधरी का नाम था। ये दोनों अफसर भी पिछले माह सेवानिवृत्त हो गए।

10:21 PM - No comments

कोठारी की कलेक्टरी सुरक्षित

खरगौन जिले के महेश्वर विधानसभा उप चुनाव में सत्तारूढ़ दल भाजपा को मिली सफलता के बाद नवनीत कोठारी को कलेक्टरी सुरक्षित हो गई है। वहीं चुनाव आयोग के निर्देश पर हटाए गए राजेश्वर प्रसाद गुप्ता को फिर से जिले का एसपी बना दिया गया।
विधानसभा उप चुनाव के दौरान कलेक्टर, एसपी के खिलाफ आयोग में लगातार शिकायतें मिलने के कारण दोनों अफसर आयोग के निशाने पर रहे। आयोग की गाज गिरी एसपी राजेश्वर प्रसाद गुप्ता पर। आयोग ने मतदान के चंद दिनों पूर्व यानी 9 जून को एसपी गुप्ता को हटाते हुए 17वीं वाहिनी भिण्ड की सेनानी रुचिका जैन जिंदल को जिले का एसपी पदस्थ किया गया था। चुनाव खत्म होते ही राज्य सरकार ने गुप्ता को फिर से खरगौन का एसपी पदस्थ कर दिया। साथ ही रुचिका जैन को वापस बुला लिया है। ऐसे में विधानसभा आम चुनाव तक इनके पास जिले की जिम्मेदारी रहना तय है। कलेक्टर नवनीत कोठारी भी कलेक्टर बने रहेंगे।

10:21 PM - No comments

‘दुस्साहसी’ हैं सरकारी महकमे


प्रदेश के 16 नगरीय निकायों में हो चुनावों के चलते आचार संहिता लगी होने के बावजूद सरकारी महकमे मनमानी करने से नहीं चूक रहे हैं। यहां तक कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी अंधेरे में रखा जा रहा है, आयोग की सख्ती के चलते सरकार को कई निर्णय बदलने पड़े या फिर उनमें रोक लगाना पड़ी। फिर भी दुस्साहस कम नहीं हो रहा है।
नगरीय निकाय चुनाव की घोषणा के साथ आयोग ने स्पष्ट कर दिया था कि चुनाव कार्य में लगे अधिकारी-कर्मचारियों का तबादला न किया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सरकार ने एक के बाद एक तबादले करना शुरू कर दिए। आईएएस और आईपीएस अफसरों का लम्बे समय से चल रहा तबादला मंथन का परिणाम आचार संहिता के दौरान  ही उजागर हुआ। अफसरों के थोक में तबादले हुए। उन जिलों और संभागों के अफसर भी प्रभावित हुए जहां चुनाव आचार संहिता प्रभावी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए उनके तबादलों पर रोक लगा दी। सरकार को अपना निर्णय बदलना पड़ा। इसी प्रकार सहकारिता, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन विभागों ने भी दुस्साहस दिखाया। आयोग इन जिलों के प्रभावित अफसर और कर्मचारियों के तबादलों पर रोक लगा दी।
गलती या मनमानी -
सवाल उठता है जब आयोग पूर्व में ही आचार संहिता प्रभावी जिलों में तबादलों पर रोक लगा चुका है तो फिर इन जिलों के अफसरों और कर्मचारियों के तबादले किए जाने का निर्णय समझ से परे है। सरकार के इस निर्णय की चर्चा मंत्रालय में तो है, लेकिन इस मामले में अफसर खुलकर चर्चा करने से कतराते हैं। आईएएस और आईपीएस अफसरों की सूची तो मुख्य सचिव से अनुमोदित हुए मुख्यमंत्री की हरीझंडी मिलने के बाद जारी होती है। यानी मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से भी ऐसा निर्णय करवा लिया गया जो नहीं होना चाहिए था। आयोग के सख्त रवैया के कारण निर्णय पर रोक लगाना पड़ी।

Saturday, June 16, 2012

10:11 PM - No comments

सरकार को आयोग का झटका ...!

राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए एक आईपीएस सहित चार आईपीएस अफसरों के तबादलों पर रोक लगा दी है। इन अफसरों का हाल ही में तबादला किया गया था। रोक लगाते हुए आयोग ने सरकार से यह भी कहा है कि नगरीय निकाय चुनाव के चलते चुनाव कार्य से जुड़े किसी भी अधिकारी-कर्मचारी का तबादला न किया जाए।

हाल ही हुई प्रशासनिक सर्जरी के दौरान बड़ी संख्या में आईएएस और आईपीएस अफसर प्रभावित हुए  थे। इसमें कुछ ऐसे अफसर भी प्रभावित हो गए थे जो चुनाव क्षेत्र में पदस्थ हैं। आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सकरार को स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि निर्देशों का पालन किया जाए। आयोग की अनुमति के बिना चुनाव कार्य से जुड़े किसी भी अधिकारी कर्मचारी को न हटाया जाए। बुधवार को जारी तबादला आदेश में सरकार ने शहडोल कमिश्नर प्रदीप खरे को रीवा स्थानांतरित करते हुए शहडोल संभाग की की जिम्मेदारी आयुक्त पिछड़ा वर्ग कल्याण रघुवीर श्रीवास्तव को दे दी थी। शहडोल से प्रदीप खरे का तबादला किए जाने पर आयोग ने सख्त आपत्ति की थी। आयोग के रुख को देखते हुए सरकार ने आनन-फानन में श्रीवास्तव को यथावत रखते हुए खरे को शहडोल संभाग का अतिरिक्त प्रभार देने के आदेश जारी कर दिए। इसी प्रकार यूआर नेताम बालाघाट आईजी को नारकोटिक्स आईजी, अरुण प्रताप सिंह आईजी शहडोल को आईजी एसएएफ पीएचक्यू पदस्थ किया। साथ ही राजाबाबू डीआईजी शहडोल को पदोन्नत करते हुए आईजी बालाघाट एवं वेद प्रकाश शर्मा डीआईजी छतरपुर को पदोन्नत करते हुए आईजी शहडोल पदस्थ किया था। आयोग के निर्देश पर इन अफसरों के तबादलों पर रोक लगाते हुए इन्हें यथावत रखा गया है। यानी अब निकाय चुनाव के बाद ही आईएएस और आईपीएस अफसरों के तबादला आदेश जारी होंगे। मालूम हो प्रदेश के रतलाम, बैतूल, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मण्डला, डिण्डोरी, बालाघाट, शहडोल, अनुपपुर, उमरिया जिले की 49 नगरीय निकाय चुनाव के चलते चुनाव आचार संहिता लागू है।