Thursday, May 10, 2012

10:33 AM - No comments

9 आईएएस अफसरों की नियुक्ति


मध्यप्रदेश संवर्ग को आवंटित भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2011 बैच के नौ परिवीक्षाधीन अधिकारियों को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में प्रथम चरण के प्रशिक्षण समाप्ति पर राज्य में प्रशिक्षण के लिए जिलों में सहायक कलेक्टर के पद पर पदस्थ किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार अनुग्रह पी को उज्जैन, विजय दत्ता को रीवा, हरजिंदर सिंह को होशंगाबाद, मोहित बुंदास को ग्वालियर, नेहा मार्व्या को बैतूल, रुचिका दिवाकर को सीहोर, सौरभ कुमार सुमन को जबलपुर, व्ही.एस.चौधरी कोलसानी को इंदौर एवं विजय कुमार जे. को सागर जिले में सहायक कलेक्टर पदस्थ किया गया है।

7:32 AM - No comments

पदोन्नति में आरक्षण की आग मप्र में भी

पदोन्नति में आरक्षण दिए जाने की आग मध्यप्रदेश में भी सुलगने लगी है। मंत्रालय, विधानसभा सचिवालय सहित अन्य सरकारी दफ्तरों में अधिकारी-कर्मचारी लामबंद होने लगे हैं। पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी दस्तक दी जा रही है।
राज्य मंत्रालय के अधिकारी-कर्मचारियों ने सामूहिक हस्ताक्षयुक्त एक ज्ञापन मुख्यमंत्री, सामान्य प्रशासन विभाग के राज्यमंत्री, मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को देते हुए मांग की है कि इसी वर्ष 27 अप्रेल को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश का पालन करते हुए मध्यप्रदेश में भी पदोन्नति में आरक्षण समाप्त किया जाए। विधानसभा सचिवालय अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त समिति ने राज्यपाल से भेंटकर आरक्षित वर्ग को पदोन्नति में आरक्षण न दिए जाने की मांग की है। अन्य सरकारी दफ्तरों में भी सक्रियता बढ़ी है। प्रदेश की भाजपा सरकार को यह भली भांति है कि प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा के आम चुनाव हैं, इसलिए किसी भी वर्ग को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता, सूबे में अधिकारी-कर्मचारियों को एक बड़ा वर्ग है। सरकार को इसकी अहमियत पता है। ऐसे में सरकार अभी इनके रुख को देख रही है। कोर्ट के फैसले का राजनैतिक अर्थ खोजे जा रहे हैं कानूनी बारीकियां भी समझीं जा रहीं हैं।
वरिष्ठता को मिले महत्व -
सूबे के अधिकारी-कर्मचारियों का जोर इसी बात पर है कि नियुक्तियों में तो आरक्षण नियम का पालन हो, लेकिन पदोन्नति में यह उचित नहीं है। वर्तमान नियमों के तहत जहां एक ओर अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों को एक पदोन्नति पाने में ही 20-20 वर्ष लग रहे हैं, जबकि आरक्षित वर्ग के कर्मचारी मात्र 2-3 वर्ष की अवधि में ही पदोन्नति प्राप्त कर लेते हैं। स्थिति यह हो रही है जो जूनियर कर्मचारी अपने सीनियर्स से भी सीनियर हो जाते हैं। तर्क दिया जा रहा है कि देश की सर्वोच्च न्यायालय की मंशा यही है कि देश के सभी प्रदेशों में भी आरक्षित वर्ग को पदोन्नति में दिए जा रहे आरक्षण समाप्त किया जाकर वरिष्ठता के आधार पर ही आरक्षण मिले।

7:22 AM - No comments

नौकरशाही को भारी झटका ....!

सूचना आयोग में रिक्त पदों पर नजर लगाए नौकरशाहों को यह खबर पढ़कर झटका लगा सकता है क्योंकि सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कोर्ट में कल इसकी सुनवाई होना है। याचिका में नियुक्ति प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग करते हुए कहा गया है कि सरकार कुछ नौकरशाहों को उपकृत करने के प्रयास में है। यदि ऐसा होता है तो योग्य लोगों को महत्व नहीं मिलेगा।
सूचना आयोग में रिक्त पदों पर कई नौकरशाहों की नजर है, इसमें सेवानिवृत्त की संख्या अधिक है। सेवानिवृत्ति से पहले मुख्य सचिव अवनि वैश्य भी इसी प्रयास में रहे कि उन्हें इस पद पर नियुक्ति मिल जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। मालूम हो आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त सहित 9 सूचना आयुक्त के पद रिक्त हैं। सरकार में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू है। लोकायुक्त संगठन के सेवानिवृत्त डीपी अरुण गुर्टू, सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने हाईकोर्ट ने तामिलनाडू सूचना आयोग में नियुक्ति के संबंध में सुप्रीमकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि नियुक्ति में संबंध में स्पष्ट नियम तैयार होना है, इसलिए अभी नियुक्तियां न हों। तर्क यह भी है कि नियुक्ति के संबंध में स्पष्ट प्रावधान न होने के कारण चयन समिति अपने स्तर पर किसी भी व्यक्ति का चयन कर लेती है, चूंकि आयोग का पद कानूनी है इसलिए इसमें विधि क्षेत्र में अधिक अनुभव रखने वालों को महत्व मिलना चाहिए। नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे इसलिए विज्ञापन के जरिए आवेदन बुलाकर नियुक्तियां हों।
होता रहा है नौकरशाहों का पुनर्वास -
प्रदेश में नौकरशाहों के पुनर्वास की लम्बी परम्परा है। यह परम्परा अभी कायम है। इसी के तहत प्रदेश के कई वरिष्ठ नौकरशाह और सेवानिवृत्त अफसर आयोग में रिक्त पदों पर काबिज होने के प्रयास में हैं। सूचना आयोग में सेवानिवृत्त नौकरशाहों को मौका मिलता रहा है।
कल होगी सुनवाई -
याचिका पर कल हाईकोर्ट में सुनवाई होना है। हाईकोर्ट में याचिका की खबर से सरकार में हलचल मची है। नौकरशाहों की नजरें भी हाईकोर्ट के रुख पर टिकी हैं।

Wednesday, May 9, 2012

8:30 PM - No comments

अफसर बोले : आल इज वेल

बारदानों को लेकर प्रदेश में भले ही हाहाकार मचा हो, किसान सड़कों पर आ गए हों, लेकिन अफसरशाही सब कुछ ठीक-ठाक मानती है। कलेक्टर अपने संभागों के कमिश्नरों को और कमिश्नर मुख्य सचिव को कुछ ऐसी ही रिपोर्ट दे रहे हैं। एयरकंडीशन चेम्बर में बैठकर हो रही समीक्षाओं में भी फीलगुड ही हो रहा है।
मंत्रालय से लेकर फील्ड में बैठे अफसर सभी ओके रिपोर्ट देते रहे, आश्चर्य यह रहा कि फील्ड से आ रही रिपोर्ट को किसी भी जिम्मेदार अफसर ने क्रॉस चैक करने की जहमत नहीं उठाई। हालात बिगड़ते गए और स्थिति सामने है। कल आनन-फानन में मुख्य सचिव ने मंत्रालय में बैठकर कमिश्नरों से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से चर्चा कर जमीनी हकीकत जानने का प्रयास किया। ज्यादातर कमिश्नरों ने स्थिति को बेहतर बताया। एक ओर सरकार दिल्ली तक बारदानों की कमी का रोना रो रही है, वहीं कलेक्टर कहते हैं कि कमी अब दूर हो रही है। हालांकि मुख्य सचिव ने स्थिति को भांपते हुए सभी कलेक्टरों और कमिश्नरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यही मौका है जब उन्हें प्रशासनिक नेतृत्व क्षमता को दिखाते हुए चुनौतियों का सामना करना है।

चीफ सेके्रटरी को कमिश्नरों ने यह दी रिपोर्ट -

सागर कमिश्नर आर के माथुर -
संभाग में बारदानों की कमी नहीं है। गेंहू भण्डारण की पूरी व्यवस्था है।

जबलपुर कमिश्नर दीपक खाण्डेकर -
संभाग में बारदाना की कोई कमी नहीं है। पश्चिम बंगाल एवं छत्तीसगढ़ से बारदानों की आपूर्ति हुई है।

भोपाल कमिश्नर प्रवीण गर्ग -
इटारसी एवं मण्डीदीप में बारदानों के रेक पहुंच जाने से काफी आसानी हुई है। संभाग में स्थिति बेहतर है।

होशंगाबाद कमिश्नर अरुण तिवारी -
संभाग में उपार्जन कार्य देर से शुरू हुआ। मई माह के अंत तक सुचारू रूप से खरीदी की व्यवस्था कर ली गई है।

ग्वालियर कमिश्नर एसबी सिंह -
बारदानों की कमी दूर हुई है। प्लास्टिक बैग भी पहुंचने लगे हैं।

चंबल कमिश्नर अशोक शिवहरे -
गेंहू खरीदी सुचारू चल रही है। खरीदी में कहीं कोई बाधा नहीं है।

उज्जैन कमिश्नर अरुण पाण्डे -
गेहंू उपार्जन कार्य सुचारू चल रहा है। मण्डी तक आने वाले किसानों से खरीदी हो रही है।

इंदौर कमिश्नर पीके पाराशर -
विक्रम नगर में तीन हजार गठानों के मिलने से आसानी हुई। धार जिले के लिए आवश्यकतानुसार अधिक बारदाना की व्यवस्था की गई है।

शहडोल कमिश्नर प्रदीप खरे -
गेंहू खरीदी में कहीं कोई बाधा नहीं है। काम-काम सुचारू ढंग से चल रहा है।

रीवा कलेक्टर शिवनारायण रुपला -
कमिश्नर टी धर्माराव की अनुपस्थिति में कलेक्टर शिवनारायण रुपला ने बताया कि सतना जिले में बारदानों की कुछ कमी अनुभव की गई है।

Tuesday, May 8, 2012

6:46 AM - No comments

31 तक नहीं होंगे कलेक्टरों के तबादले

कलेक्टरी छिनने का तनाव झेल रहे आईएएस अफसरों के लिए यह राहत भरी खबर हो सकती है क्योंकि इस महीने किसी भी कलेक्टर का तबादला नहीं होगा। गेंहू खरीदी को लेकर प्रदेश में बने हालातों को देखते हुए ऐसा निर्णय लिया गया है। यानी जब तक गेंहू खरीदी होती रहेगी अफसरों की कलेक्टरी सुरक्षित रहेगी।
इसी माह की एक तारीख को आर परशुराम द्वारा मुख्य सचिव पद की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही आईएएस अफसरों के तबादलों की अटकलें शुरू हो गई थीं। तर्क दिया जा रहा था कि एक हफ्ते में परशुराम अपनी टीम तैयार कर लेंगे, लेकिन हालातों को देखते हुए ऐसा नहीं हुआ। हालांकि यह तय है कि टीम परशुराम जब भी बनेगी बहुत ताकतवर होगी। मुख्यमंत्री भी यही चाहते हैं कि फील्ड में अब ऐसे अफसरों को पदस्थ किया जाए तो जिन्हें आगामी विधानसभा चुनाव तक न हटाना पड़े। जाहिर है ऐसे अफसरों की पदस्थापना बदली जाएगी, जिन्हें एक ही जिले में तीन वर्ष हो गए हैं या फिर अगले वर्ष तीन साल पूरे हो जाएंगे। इस क्राइट एरिया में आए अफसरों की सूची तैयार कर ली गई है। लेकिन अभी इनकी पदस्थापना के मामले में अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
इन जिलों को मिलेंगे नए कलेक्टर -
प्रदेश के तीन जिले ऐसे हैं जहां नए कलेक्टर मिलना तय है। इनमें सागर, शाजापुर और श्योपुर जिला शामिल है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि शाजापुर कलेक्टर सोनाली वायंगणकर और श्योपुर कलेक्टर ज्ञानेश्वर पाटिल ने मध्यप्रदेश में सेवाएं न देने का निर्णय लेते हुए महाराष्ट्र कॉडर मांगा है। इसी प्रकार सागर कलेक्टर इ. रमेश कुमार आंध प्रदेश कॉडर में जाना चाहते हैं। इन अफसरों के आवेदनों पर विचार हो रहा है।
अफसरों में सक्रियता -
यह तो तय है कि प्रदेश में किसानों से गेंहू खरीदी तक कलेक्टरों के तबादले नहीं होंगे। इसके पहले गेंहू खरीदी 20 मई तक होना थी, इसके बाद कलेक्टरों के तबादले होना थे, लेकिन अब यह तिथि बढ़ाकर 31 मई कर दिए जाने से अफसरों ने राहत की सांस तो ली है, लेकिन उनकी सक्रियता में कोई कमी नहीं आई है। लम्बे समय से जो कलेक्टरी का सुख भोग रहे हैं वे कलेक्टरी छोड़ना नहीं चाहते, तीन वर्ष के क्राइट एरिया में आने वाले अफसरों का प्रयास है कि उन्हें नए जिले की जिम्मेदारी मिल जाए। जो अफसर कलेक्टरी सुख से वंचित हैं वे ज्यादा सक्रिय हैं। इसके लिए वे राजनैतिक संबंधों का भी इस्तेमाल करने में भी परहेज नहीं बरत रहे हैं।

Monday, May 7, 2012

12:31 AM - No comments

दादा रोहाणी ने निभाई तिवारी परम्परा

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों का विवाद चल ही रहा था अब वर्तमान अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों पर भी उंगलियां उठाई जाने लगी हैं। विधानसभा सचिवालय में ऐसी नियुक्तियों की संख्या 175 है। इनमें करीब 25 नियुक्तियां इसी कार्यकाल की हैं। अब निर्णय कोर्ट को करना है। सुनवाई इसी माह की 19 तारीख को हाईकोर्ट में होना है। क्योंकि अपीलकर्ता ने सचिवालय के निर्णय को चुनौती देते हुए कहा था कि नियमों को दरकिनार कर नियुक्त किए गए सभी की नियुक्ति अवैध घोषित की जाए। इसी के जवाब में सचिवालय ने कोर्ट को यह जवाब पेश कर दिया। ऐसे में वर्तमान नियुक्तियां भी जांच के दायरे में आ गई।

12:31 AM - No comments

डीपीसी हुई अब प्रमोशन का इंतजार

एडीजी से डीजी के पद पर प्रमोशन के लिए डीपीसी हुए लम्बा अंतराल बीत जाने के बाद भी प्रमोशन नहीं होने पर आईपीएस अफसरों में सक्रियता बढ़ी है। मालूम हो राज्य में पुलिस महानिदेशक (डीजी) के तीन और इतने ही एक्स कॉडर के पद हैं। इसमें एक पद खाली है, जबकि दो पद इसी वर्ष रिक्त हो रहे हैं। रिक्त पद होमगार्ड डीजी का कॉडर है, जबकि मानव अधिकार आयोग के डीजी एचके सरीन इसी वर्ष जून में और पीएचक्यू में ओएसडी वीएम कंवर सितम्बर माह में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। हाल ही में अरोरा को होमगार्ड डीजी का प्रभार दिया जा चुका जबकि सुरेन्द्र सिंह की जिम्मेदारी मिली है। डीपीसी में 1979 से 1981 बैच के आईपीएस अफसरों के नामों पर विचार हुआ। इनमें 1979 बैच के आरसी अरोरा, 1980 बैच के सुरेन्द्र सिंह, 1981 बैच के एके धस्माना और डॉ. आनंद कुमार, 1982 बैच के एसएस लाल प्रमुख हैं। 1981 बैच के दोनों अफसर केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। इसलिए एसएस लाल सहित आरसी अरोरा और सुरेन्द्र सिंह का प्रमोशन तय है।