पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों का विवाद चल ही रहा था अब वर्तमान अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों पर भी उंगलियां उठाई जाने लगी हैं। विधानसभा सचिवालय में ऐसी नियुक्तियों की संख्या 175 है। इनमें करीब 25 नियुक्तियां इसी कार्यकाल की हैं। अब निर्णय कोर्ट को करना है। सुनवाई इसी माह की 19 तारीख को हाईकोर्ट में होना है। क्योंकि अपीलकर्ता ने सचिवालय के निर्णय को चुनौती देते हुए कहा था कि नियमों को दरकिनार कर नियुक्त किए गए सभी की नियुक्ति अवैध घोषित की जाए। इसी के जवाब में सचिवालय ने कोर्ट को यह जवाब पेश कर दिया। ऐसे में वर्तमान नियुक्तियां भी जांच के दायरे में आ गई।
एडीजी से डीजी के पद पर प्रमोशन के लिए डीपीसी हुए लम्बा अंतराल बीत जाने के बाद भी प्रमोशन नहीं होने पर आईपीएस अफसरों में सक्रियता बढ़ी है। मालूम हो राज्य में पुलिस महानिदेशक (डीजी) के तीन और इतने ही एक्स कॉडर के पद हैं। इसमें एक पद खाली है, जबकि दो पद इसी वर्ष रिक्त हो रहे हैं। रिक्त पद होमगार्ड डीजी का कॉडर है, जबकि मानव अधिकार आयोग के डीजी एचके सरीन इसी वर्ष जून में और पीएचक्यू में ओएसडी वीएम कंवर सितम्बर माह में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। हाल ही में अरोरा को होमगार्ड डीजी का प्रभार दिया जा चुका जबकि सुरेन्द्र सिंह की जिम्मेदारी मिली है। डीपीसी में 1979 से 1981 बैच के आईपीएस अफसरों के नामों पर विचार हुआ। इनमें 1979 बैच के आरसी अरोरा, 1980 बैच के सुरेन्द्र सिंह, 1981 बैच के एके धस्माना और डॉ. आनंद कुमार, 1982 बैच के एसएस लाल प्रमुख हैं। 1981 बैच के दोनों अफसर केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। इसलिए एसएस लाल सहित आरसी अरोरा और सुरेन्द्र सिंह का प्रमोशन तय है।
मध्यप्रदेश कॉडर के आईएएस अधिकारी अरविन्द जोशी और टीनू जोशी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। आयकर कार्यवाही के दौरान इनके निवास से आकूत दौलत मिलने के बाद राज्य सरकार ने इन्हें निलंबित कर दिया है। अब हाल ही में इन्हें बर्खास्त किए जाने की सिफारिश भी केन्द्र सरकार को कर दी गई। प्रदेश के इतिहास में शायद यह पहला मामला है कि किसी आईएएस दम्पत्ति को बर्खास्त किए जाने की सिफारिश की गई हो। प्रदेश सरकार द्वारा जोशी दम्पत्ति को बर्खास्त किए जाने के बाद अब गेंद केन्द्र के पाले में है, क्योंकि अखिल भारतीय सेवा अफसरों की सेवाएं केन्द्र में होती हैं। अब निर्णय केन्द्र को ही लेना है। केन्द्र इनकी बर्खास्ती पर मोहर लगाएगा इसके बाद राज्य सरकार औपचारिक आदेश जारी करेगी।
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सरकार को चुनौती देने वाले आईएएस अफसर नवनीत मोहन कोठारी को अब जेब ढीली करना होगी। मामला दो सरकारी मकानों पर कब्जा जमाने से जुड़ा है।
बालाघाट कलेक्टर रहे कोठारी की कुछ समय के लिए भोपाल में पदस्थापना हुई थी। उस दौरान इन्हें निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में पदस्थ किया गया था। उसी समय इन्हें भोपाल के चार इमली स्थित डी 3/2 बंगला आवंटित हुआ था, लेकिन कुछ समय बाद ही इन्हें खरगौन जिले की कलेक्टरी मिल गई। इन्होंने खरगौन में ज्वाइन तो कर लिया लेकिन भोपाल का बंगला नहीं छोड़ा। संपदा संचालनालय ने इन्हें बंगला खाली करने के लिए कई नोटिस भी भेजे लेकिन इन्हें बंगला खाली करने के बजाय कोर्ट की शरण ली। सरकार ने कोर्ट को बताया कि नियमानुसार एक व्यक्ति को एक ही सरकारी मकान की पात्रता होती है, चूंकि कोठारी खरगोन कलेक्टर हैं, उन्हें वहां सरकारी मकान आवंटित है इसलिए उन्हें भोपाल का मकान खाली करना होगा। भोपाल में सरकारी मकान के इसलिए भी पात्र नहीं हैं क्योंकि इनकी पदस्थापना भोपाल शहर में नहीं है।
दो माह के लिए मिली थी अनुमति -
10 सितम्बर 2011 को खरगोन कलेक्टर बनाए गए कोठारी को दो माह के लिए भोपाल में सरकारी मकान की अनुमति थी। इसके बाद इन्होंने यह अवधि और बढ़ाए जाने का आवेदन किया लेकिन सरकार ने उनका आवेदन खारिज करते हुए मकान खाली करने का आदेश दिया।
बाजार दर से होगी बसूली -
कोठारी से अब राज्य सरकार बाजार दर से मकान किराया बसूलने की तैयारी कर रही है। इसके लिए उनकी फाइल खंगाली जा रही है। हिसाब-किताब तैयार होते ही उन्हें वसूली का नोटिस जारी किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के विमान बेड़े में शामिल हवाई जहाज और हैलीकॉप्टर के पायलटों, इंजीनयरों को दोगुना वेतन मिलेगा। यह चीफ सेके्रटरी के वेतन से ढाई गुना अधिक होगा। वेतनभत्तों के मामले में गठित कमेटी ने यह अनुशंसा मुख्यमंत्री को भेज दी है।
पायलट और इंजीनियर लम्बे समय से सरकार पर दवाब बना रहे थे कि निजी विमानन सेवाओं की तुलना में उनके वेतनभत्ते कम हैं। मामला मुख्यमंत्री के हवाईबेड़े से जुड़ा होने के कारण सरकार भी सक्रिय हुई। इसके लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया गया। कमेटी ने मंथन के बाद वित्त विभाग को अनुशंसा भेज दी थी। वित्त विभाग की सहमति के बाद सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री के पास फाइल भेज दी गई है। मुख्यमंत्री की हरीझंडी मिलते ही पायलट और इंजीनियरों को बढ़े हुए वेतन-भत्ते मिलने लगेंगे। यह उनको वर्तमान में मिल रहे वेतन से दोगुना होगा।
पैकेज में शामिल होंगी सभी सुविधाएं -
कमेटी ने अनुबंध में कार्यरत पायलट और इंजीनियरों के पैकेज में बढ़ोत्तरी करते हुए दोगुना करने की अनुशंसा की है। इनको अब अलग से मकान किराया, वाहन भत्ता सहित अन्य सुविधाएं नहीं मिलेंगी। यानी यह सब पैकेज में शामिल होगा। जबकि नियमित पायलट और इंजीनियरों के मामले में ऐसा नहीं होगा। उनका वेतन तो यथावत रहेगा, लेकिन भत्ते बढ़ जाएंगे, जिससे उनको मिलने वाली तनख्वाह अनुबंधितों से समान हो जाए।
यह है पायलटों का वेतन -
चीफ पायलट अनंत सेठी को वेतनभत्ता मिलाकर करीब ढाई लाख रुपया मिलता है, जबकि पायलटों को करीब डेढ़ लाख रुपया मिलता है। अनुबंधित पायलटों के लिए चार स्लैब एक लाख, 1.50 लाख, 1.75 लाख और 1.90 लाख रुपया मिलता है। अनुबंधित पायलटों का वेतन अब दोगुना हो जाएगा। यानी इन्हें क्रमश: 2 लाख, 3 लाख, 3.50 लाख, 3.80 लाख रुपया प्रतिमाह वेतन मिलेगा। नियमित पायलटों के भत्तों में इजाफा होगा।
यह है मुख्य सचिव का वेतन -
मुख्य सचिव को 80 हजार रूपए बेसिक पे के साथ डीए, ग्रेड पे व अन्य भत्ते मिला कर करीब डेढ़ लाख रूपए प्रतिमाह वेतन के रूप में मिलते हैं। प्रदेश में भारतीय पुलिस सेवा के सर्वोच्च अधिकारी डीजीपी और भारतीय वन सेवा के एक प्रमुख अधिकारी को भी मुख्य सचिव के समान बेसिक वेतन, ग्रेड पे और डीए व अन्य भत्ते दिए जाते हैं।

रॉक ऑन’ की सफलता के बाद फिल्मकार अभिषेक कपूर अब ‘द थ्री मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ’ नाम के उपन्यास पर आधारित अपनी अगली फिल्म बनाने जा रहे हैं। अभी इस फिल्म को कोई नाम नहीं दिया गया है। इसकी शूटिंग इसी महीने शुरू होगी।
केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के विरोध में तमाम व्यापारिक संगठनों द्वारा तीन दिवसीय प्रदेश बंद के पहले दिन सोमवार को जनजीवन प्रभावित हुआ। पूरे प्रदेश में चाय, नाश्ते से लेकर सब्जी व किराना तक की दुकानें बंद हैं। राज्य के लगभग 50 व्यापारिक संगठनों ने केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा कानून को काला कानून करार देते हुए सोमवार से तीन दिवसीय बंद का आह्वान किया। बंद 12 अप्रैल तक चलेगा।