Monday, August 27, 2012

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नौकरशाहों पर असमंजस में सरकार


सूबे के आधा दर्जन आईएएस अफसर ऐसे हैं जिनके मामले में असमंजस की स्थिति है। इसमें से ज्यादातर मध्यप्रदेश में सेवाएं देने के मूड में नहीं है, जबकि कुछ मनमर्जी से काम कर रहे हैं। गेंद सरकार के पाले में है, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
प्रदेश में आईएएस अफसरों का टोटा होने के कारण राज्य सरकार चाहती है कि अफसर यहीं काम करें, इसलिए कॉडर परिवर्तन की हरीझंडी मिलने के बाद भी सरकार इन्हें रिलीव नहीं कर रही है, जबकि कुछ के मामले केन्द्र में लंबित हैं। प्रदेश में तेजी से बदल रहे राजनैतिक घटनाक्रम के चलते इन अफसरों की फाइल भी ठण्डे बस्ते है।
मधुरानी तेवतिया -
आईपीएस पति की मौत के बाद प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाया। असुरक्षित महसूस कर रहीं श्रीमति तेवतिया ने मध्यप्रदेश में नौकरी न करने का निर्णय लिया। राज्य सरकार से आग्रह किया कि उनका कॉडर बदलकर उत्तर प्रदेश किया जाए। प्रदेश सरकार अपनी अनुशंसा के साथ केन्द्र सरकार को फाइल केन्द्र सरकार को भेज चुकी है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।
ई रमेश कुमार -
सागर कलेक्टर हैं। मध्यप्रदेश छोड़कर आंध्र प्रदेश में सेवाएं देने की इच्छा व्यक्त की। केन्द्र सरकार ने इनके आग्रह को मानते हुए इन्हें हरीझंडी दिखा दी। केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय इस संबंध में दो माह पूर्व आदेश भी जारी कर चुका है, लेकिन अभी तक राज्य सरकार ने इन्हें रिलीव नहीं किया है। तर्क दिया जा रहा है कि अब इनका मूड बदल गया है, अब ये मध्यप्रदेश में ही सेवाएं देने के इच्छुक हैं। इन्हीं के आग्रह पर ही राज्य सरकार ने इन्हें रिलीव न करने का निर्णय लिया है।
सोनाली वायंगणकर -
मध्यप्रदेश को छोड़कर महाराष्ट्र राज्य में सेवाएं देना चाहती हैं। इसके लिए पारिवारिक कारण बताते हुए राज्य सरकार से आग्रह कर चुकी हैं। आग्रह किए जाने के दौरान ये शाजापुर कलेक्टर थीं, वहां से बुला लिया गया है, लेकिन इनके मामले में अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
ज्ञानेश्वर पाटिल -
श्योपुर कलेक्टर हैं। महाराष्ट्र राज्य में सेवाएं देना चाहते हैं। राज्य सरकार कॉडर बदलने के लिए प्रदेश सरकार को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन राज्य सरकार इन्हें मध्यप्रदेश में ही रखना चाहती है। भोपाल जिला पंचायत सीईओ रहते हुए चर्चा में आए। श्योपुर में भी ये सुर्खियों में हैं।

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केन्द्र पर टिका आईएएस यादव का भविष्य


नाफरमान आईएएस अनिल यादव का भविष्य अब केन्द्र सरकार पर टिका है, इन्हें नाफरमानी की सजा मिलना है। राज्य को केन्द्र के आदेश की प्रतीक्षा है।
मध्यप्रदेश कॉडर में 1999 बैच के आईएएस अफसर अनिल यादव 25 जुलाई 2007 से 24 जुलाई 2009 तक के लिए अध्ययन अवकाश पर विदेश गए थे। अवकाश अवधि समाप्त होने के बाद न तो वापस लौटे और न ही इन्होंने कोई सूचना दी। जब ये चार साल तक नहीं लौटे तो सरकार सक्रिय हुई और इनकी तलाश शुरू की गई। प्रदेश सरकार ने इसे नाफरमानी मानते हुए इनके निवास पर पत्र भेजे गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया। आखिरकार राज्य सरकार गायब हुए अफसर के बारे में केंद्र को सूचना भेजते हुए वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया। इस बीच यादव ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखा जिसमें यह बताने का प्रयास किया कि वे गायब नहीं हैं बल्कि लौट रहे हैं। राज्य सरकार उनके तर्क से सहमत नहीं है। सरकार को इनके पत्र तो मिल रहे हैं, लेकिन इन्होंने अपनी आमद नहीं दी। अब राज्य सरकार केन्द्र सरकार के मार्गदर्शन का इंतजार कर रही है।
असमंजस में सरकार -
आईएएस यादव ने राज्य सरकार को अपनी अचल सम्पत्ति की जानकारी भी भेजी है, अब सरकार यह नहीं समझ पा रही है कि इसे रिकार्ड में लिया जाए नहीं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि राज्य को अभी केन्द्र की तरफ से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं कि इनके मामले में क्या करना है।

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7 अन्य विधायकों को भी मिलेगी माफी


कांग्रेस के दो विधायकों चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और कल्पना पारुलेकर की सदस्यता बहाली के लिए बुलाए जा रहे विधानसभा के विशेष सत्र के साथ ही 7 अन्य विधायकों के मामले में गंभीरता से विचार शुरू है। विशेषाधिकार समिति इन विधायकों से अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी कर चुकी है। हालांकि अभी तक विधायकों की ओर से कोई जबाव नहीं आया है। विधायकों की ओर से जबाव आने के बाद समिति इनके मामले में फैसला लेगी।
हाल ही में समाप्त हुए मानसून सत्र के दौरान के दौरान भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा कराए जाने को लेकर सत्ता और विपक्षी दल के सदस्यों में तीखी नोकझोंक हुई। सदन में चर्चा न कराए जाने से नाराज कांग्रेस विधायकों ने 17 तारीख को तो स्पीकर के कक्ष के बाहर धरना दे दिया, जिसके कारण स्पीकर कक्ष से बाहर ही नहीं आ पाए। सदन में भी अजीब स्थिति बनी। कांग्रेस के सदस्य आसंदी के इर्दगिर्द पहुंच गए। इस कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई। गतिरोध के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करना पड़ी। सदन में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्यों की कार्यप्रणाली पर सत्तारूढ़ दल भाजपा के अनूप मिश्रा, सुदर्शन गुप्ता, तारचंद बाबरिया, शरद जैन एवं अन्य सदस्यों ने विशेषाधिकार भंग की सूचना दी थी।
ये हैं आरोपी विधायक -
स्पीकर ईश्वरदास रोहाणी ने कांग्रेस विधायक लाखन सिंह यादव, राम निवास रावत, पुरुषोत्तम दांगी, विजेन्द्र सिंह मालाहेड़ा, आरिफ अकील, नारायण सिंह प्रजापति, श्रीमती इमरती देवी को विशेषाधिकार भंग का आरोपी मानते हुए मामला विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया। मामला कमेटी के विचारार्थ है।

6:39 AM - No comments

नहीं खुल सकी आईएएस राजौरा की फाइल


मध्यप्रदेश कॉडर में 1990 बैच के आईएएस अफसर राजेश राजौरा की फाइल खुलने का रास्ता साफ होने के बाद भी सरकार ऐसा नहीं कर पा रही है। लम्बे समय से निलंबन का बोझ झेल रहे राजौरा भी चाहते हैं कि उनके मामले में सरकार शीघ्र निर्णय ले, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।
गृह सचिव रहते हुए करीब तीन वर्ष पूर्व आयकर छापे के दौरान इनके यहां आय से अधिक सम्पत्ति और करोड़ों रुपए की अचल सम्पत्ति के दस्तावेज मिलने के बाद से राज्य सरकार ने इन्हें निलंबित कर दिया था।

Friday, July 20, 2012

9:31 PM - No comments

विधानसभा : छोटों पर गाज, बड़े सुरक्षित

विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांगे्रस द्वारा किए गए हंगामे और उनके आसंदी तक पहुंच जाने के मामले में विधानसभा सचिवालय ने इसे सुरक्षा में चूक माना है। इसके लिए सुरक्षा से जुड़े चार लोगों को निलंबित करते हुए पांच से स्पष्टीकरण मांगा गया है। सचिवालय की इस कार्रवाई से असंतोष भी दिखने लगा है। इसका प्रमुख कारण छोटों पर गाज और बड़ों पर आंच न आना माना जा रहा है।
मामला 17 जुलाई की घटना से जुड़ा है। इस दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्य स्पीकर के कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए, इस कारण न तो स्पीकर सदन में पहुंच सके और न ही राजदण्ड सदन में ले जाया गया। सदन की बात की जाए तो यहां कांग्रेसी विधायक सभापति की आसंदी के पास जा पहुंचे। हालांकि इस घटना के बाद कांग्रेस के दो विधायकों चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और कल्पना पारुलेकर की सदस्यता समाप्त की जाकर आधा दर्जन विधायकों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला बना है। अब सभी की नजर यहां की सुरक्षा पर थी, कि मार्शलों के होते हुए आसंदी तक विधायक कैसे पहुंच गए।
11 लोग आए लपेटे में -
सहायक संचालक सुरक्षा सतीश कुमार पाण्डे, मार्शल कमलेश सिंह, सहायक मार्शल शिवाकांत दुबे, सुरक्षा गार्ड सुरेश मिश्रा को कर्त्तव्य में लापरवाही के कारण निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा वाचस्पति मिश्रा मार्शल, सहित सहायक मार्शलों में प्रदीप पाण्डे, विश्वनाथ चर्मकार, अरविन्द शर्मा, नारायण गौतम, रावेन्द्र पाण्डे और वंदना अंवाडकर सुरक्षा गार्ड को कारण बताओ नोटिस दिया गया है।
जिम्मेदारी तय नहीं -
सचिवालय ने चार को निलंबित किए जाने के साथ सात लोगों से स्पष्टीकरण तो मांगा है, लेकिन अभी तक अन्य वरिष्ठों की जिम्मेदारी तय नहीं की है। मालूम हो अरविन्द रघुवंशी सुरक्षा संचालक हैं, जेके शर्मा उप संचालक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सतीश भार्गव चीफ मार्शल हैं।
अधिकारी बोले -
प्रारंभिक तौर पर जिनकी गलती नजर आई, उन पर कार्यवाही की गई है। मामले की जांच की जाएगी, यदि इसमें अन्य लोगों की लारपवाही सामने आएगी तो उनके खिलाफ भी कार्यवाही होगी।
राजकुमार पाण्डे, प्रमुख सचिव विधानसभा

9:30 PM - No comments

स्पीकर रोहाणी सेफ ...!

विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के प्रति अविश्वास प्रकट करते हुए विपक्षी सदस्यों ने भले ही सचिवालय को अविश्वास प्रस्ताव दिया हो, लेकिन स्पीकर के लिए यह राहत की बात है कि वे पूरी तरह सुरक्षित (सेफ) हैं।
राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सदन में सरकार को घेरने की हरसंभव कोशिश की। ये भ्रष्टाचार पर चर्चा कराए जाने को अड़े रहे। मानसून सत्र के पहले दिन यानी 16 जुलाई को जब मांग नहीं मानी गई तो 17 जुलाई को तो विपक्षी दल के सदस्यों ने स्पीकर के कक्ष के सामने धरना दे दिया। मुख्य विपक्षी दल ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रकट करते हुए विधानसभा के प्रमुख सचिव को अविश्वास प्रस्ताव भी दिया। चूंकि अविश्वास प्रस्ताव स्पीकर के खिलाफ है, इसलिए सचिवालय अभी भी माथापच्ची में जुटा है। नियमों को खंगाला जा रहा है, विधानसभा कार्यसंचालन नियमों को देखकर तो यही कहा जा रहा है कि स्पीकर रोहाणी की कुर्सी सुरक्षित है। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव अभी अमान्य नहीं किया गया है, सचिवालय कभी भी यह फाइल बंद कर सकता है।
यह है नियम -
विधानसभा कार्यसंचालन नियम के तहत विधानसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की सूचना 14 दिन पूर्व देना अनिवार्य है। यह भी देखना जरूरी है कि सूचना देने के बाद कार्रवाई के लिए 14 दिन शेष हैं या नहीं। स्पीकर के लिए यही नियम राहत का है क्योंकि मानसून सत्र मात्र 12 दिन का था, और इसमें 10 बैठकें होना थीं। सत्र की एक बैठक हो चुकी थी। यानी 14 दिन का समय ही नहीं था। सदन की कार्रवाई भी समय से पहले स्थगित हो गई। सचिवालय के एक जिम्मेदारी अधिकारी बताते हैं कि ऐसी परिस्थिति में अविश्वास प्रस्ताव स्वयं ही अमान्य हो जाएगा।
10 फीसदी सदस्यों की सहमति जरूरी -
विधानसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को मान्य किए जाने के मामले में सदन में मौजूद 10 फीसदी सदस्यों की सहमति जरूरी है। यानी 230 सदस्यों वाली विधानसभा के यदि 23 सदस्य सदन में अविश्वास के पक्ष में अपना वोट देते हैं तो प्रस्ताव मान्य हो जाता है, यानी जिसके खिलाफ प्रस्ताव लाया जाता है उसे कुर्सी छोड़ना होगी।

9:29 PM - No comments

निलंबित आईएएस कटेला बहाल

महिला से दुष्कृत्य किए जाने के आरोप में पांच साल से निलंबित चल रहे आईएएस अफसर वीके कटेला को राज्य सरकार ने बहाल कर दिया है। इन्हें संस्कृति विभाग का अपर सचिव पदस्थ किया गया है।
मामला 19 मार्च 1999 का है जब ये बिलासपुर जिला पंचायत में सीईओ थे। उस दौरान उनके अधीनस्थ आदिम जाति कल्याण विभाग की एक अधीक्षिका ने इनके ऊपर ज्यादती का आरोप लगाते हुए एक नवम्बर 2000 को अनुसूचित कल्याण थाने में ज्यादती की रिपोर्ट दर्ज कराई। न्यायालय में चालान पेश हुआ और गिरफ्तारी भी हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए इधर मध्यप्रदेश सरकार ने 15 अप्रेल 2007 में इन्हें निलंबित करते हुए विभागीय जांच भी शुरू कर दी। आरोप सिद्ध न होने के कारण हाईकोर्ट ने बरी कर दिया था। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि कटेला का निलंबन भी समाप्त हो जाएगा। 15 जुलाई को इनकी निलंबन अवधि समाप्त हो रही थी। अब सरकार ने भी इनको बहाल कर दिया है।
मंत्रालय में इनकी बदली जिम्मेदारी -
राज्य सरकार ने मंत्रालय स्तर पर एक दर्जन अफसरों की जिम्मेदारी भी बदली है। केदार शर्मा को अपर सचिव कृषि, विवेक जैन को अपर सचिव वाणिज्यिक कर, यूके सुबुद्धि को अपर सचिव वित्त, मूलचंद वर्मा को उप सचिव गृह, अजय शर्मा को उप सचिव गृह, अभय वर्मा को उप सचिव सामाजिक न्याय, अमर सिंह चंदेल को उप सचिव जीएडी, उषा परमार को उप सचिव जीएडी, संजीव श्रीवास्तव उप सचिव श्रम, एसएल अहिरवार को उप सचिव आवास एवं पर्यावरण पदस्थ किया गया है।