Monday, August 27, 2012

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प्रदेश से मोह भंग हुआ नौकरशाहों का


मध्यप्रदेश छोड़ने के इच्छुक आईएएस अफसरों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। हालांकि राज्य सरकार इन अफसरों को छोड़ने के मूड में नहीं है, लेकिन अफसरों के लगातार आग्रह के बाद लगता है कि सरकार इन्हें ज्यादा दिन रोक पाएगी। मालूम हो अभी सरकार के सरकार के पास आठ आईएएस अफसरों के आवेदन लंबित हैं।
सख्त मिजाजा और तेज तर्रार आईएएस अफसरों में शुमार शैलेन्द्र सिंह कल ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलकर उन्हें अपनी भावनाओं से अवगत करा चुके हैं। मालूम हो अब केन्द्र सरकार में सेवाएं देना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए आवेदन दिया है। हालांकि सरकार चाहती है कि वे प्रदेश में ही सेवाएं देते रहें। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के संचालक बनाए गए संजय गोयल ने भी पांच वर्ष के लिए केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की इच्छा जताई है। सरकार के पसंदीदा अफसरों में शुमार गोयल के इस निर्णय से आला अफसर भी आश्चर्य चकित हैं कि वे केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर क्यों जाना चाहते हैं, क्योंकि भारी विरोध के बावजूद इन्हें स्वास्थ्य विभाग की कमान सौंपी गई थी। ज्ञानेश्वर पाटिल और सोनाली वायंगणकर महाराष्ट्र राज्य में सेवाएं देना चाहते हैं। इसके लिए आवेदन किए हुए इन्हें लम्बा समय हो चुका है। के वासुकी, आइरिन सिंथिया भी अब मध्यप्रदेश में सेवाएं देने के मूड में नहीं है।
इन्हें मिली अनुमति -
मुधरानी तेवतिया एक मात्र आईएएस अफसर हैं जिन्हें राज्य सरकार ने प्रदेश छोड़ने की अनुमति दी है। ये कॉडर परिवर्तन करवाना चाहती हैं। राज्य सरकार ने अपनी अनुशंसा के साथ केन्द्र सरकार को इनका आवेदन भेज दिया है। अब यह मामला केन्द्र सरकार में लंबित है।
ई रमेश कुमार का मूड बदला -
सागर कलेक्टर ई रमेश कुमार भी केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहते थे। केन्द्रीय कार्मिम मंत्रालय ने इनकी प्रतिनियुक्ति के आदेश जारी कर दिए, लेकिन राज्य सरकार ने इनको कार्यमुक्त नहीं किया। बताया जा रहा है कि अब वे प्रदेश नहीं छोड़ना चाहते, उनके आग्रह पर ही राज्य सरकार ने कार्यमुक्त नहीं किया।
बिना काम के अफसर -
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ आईएएस अफसर ऐसे भी हैं जो लम्बे समय से बिना काम के हैं। 5 जुलाई को राज्य सरकार ने इन्हें आनन फानन में सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव पद से हटा दिया। इसके बाद से इन्हें किसी भी विभाग की जिम्मेदारी नहीं मिली है। चर्चा है कि लम्बे समय से बिना के काम अफसर सामंतराय भी अब प्रदेश छोड़ने की तैयारी में हैं।

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कलेक्टरों की राय होती रहे ‘परख’


सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और उनका फीडबैक लेने के लिए मुख्य सचिव परख कार्यक्रम के जरिए इनकी जमीनी हकीकत जानने का प्रयास करते हैं, लम्बे समय से चल रहे इस कार्यक्रम को अब और बेहतर बनाने की कवायद शुरू हुई है। इसी के तहत मुख्य सचिव ने कलेक्टरों, कमिश्नरों से फीडबैक लेना शुरू किया है। प्रारंभिक तौर पर हुई चर्चा के दौरान ज्यादातर कलेक्टरों का यही सुझाव रहा कि यह कार्यक्रम चलता रहना चाहिए।
मुख्य सचिव आर परशुराम ने परख कार्यक्रम के दौरान कल एक दर्जन अफसरों के सुझाव मांगे। उन्होंने जानना चाहा कि परख कार्यक्रम के मौजूदा स्वरूप में क्या परिवर्तन हो सकता है, या फिर इसे इसी तरह चलते रहना चाहिए। इस पर भोपाल, जबलपुर, रायसेन, बैतूल, हरदा, रीवा, सिवनी इत्यादि जिलों के कलेक्टरों ने सुझाव दिया कि परख कार्यक्रम चलते रहना चाहिए। इसी प्रकार रीवा और जबलपुर कमिश्नर से भी सुझाव मांगे लिए गए। ये भी इस कार्यक्रम के पक्ष में नजर आए। हालांकि ज्यादातर अफसर इस बात पर सहमत रहे कि इस कार्यक्रम के मौजूदा स्वरूप में कुछ परिवर्तन हो सकता है, लेकिन इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए। यहां यह बताना जरूरी है कि परख कार्यक्रम के जरिए कृषि कार्यो फसलों की स्थिति एवं खाद, बीज, की उपलब्धता तथा वितरण की समीक्षा, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, जलाभिषेक सहित सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न अभियान की समीक्षा, प्रदेश में वर्षा और सूखे की स्थिति, महाविद्यालयों में रेगिंग की रोकथाम, आने वाले त्यौहारों पर कानून व्यवस्था की समीक्षा, नगरीय क्षेत्रों में नालियों की साफ-सफाई की स्थिति, उर्वरक व्यवस्था इत्यादि की समीक्षा होती है। कलेक्टरों का भी यही मानना है कि यह समीक्षा स्वयं मुख्य सचिव करते हैं, ऐसे में अन्य अफसर भी एलर्ट रहते हैं क्योंकि मुख्य सचिव सीधे जवाब तलब करते हैं।

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कर्मचारियों को 7 फीसदी डीए की सौगात

 सूबे के अधिकारी कर्मचारियों को 7 फीसदी अतिरिक्त डीए मिलेगा। बढ़े हुए डीए का लाभ उन्हें इसी माह से मिलने लगेगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में यह घोषणा की।
स्वतंत्रता दिवस इस बार प्रदेश के कर्मचारियों के लिए कई सौगातें लेकर आया है। स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पूर्व कर्मचारियों को गई भत्ते इत्यादि की सौगात पहले ही मिल चुकी। कल सूबे के अधिकारी-कर्मचारियों को डीए की सौगात भी मिल गई। मुख्यमंत्री की इस घोषणा का लाभ सूबे के सभी पांच लाख कर्मचारियों सहित पेंशनरों को भी मिलेगा। मालूम हो राज्य के कर्मचारियों को 58 फीसदी डीए मिलता है, 7 फीसदी अतिरिक्त डीए मिलने से अब अधिकारी-कर्मचारियों को 65 फीसदी डीए मिलने लगेगा। इसके बाद केन्द्र और राज्य के कर्मचारियों में डीए का अंतर समाप्त हो जाएगा।

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मौसम ने रोकी माननीयों की यात्रा

मध्यप्रदेश विधानसभा की विभिन्न कमेटियां अन्य राज्यों की विधानसभाओं की कार्यप्रणाली को समझने के लिए जाती इसके पहले ही मौसम रोड़ा बन गया। कमेटियों को अपना दौरा निरस्त करना पड़ा है। अब मौसम का मिजाज ठीक होने के बाद नए सिरे से दौरा कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे।
विशेषाधिकार समिति की हाल ही में हुई बैठक के दौरान तय किया गया कि समिति उत्तराखण्ड राज्य का अध्ययन करेगी। इस दौरान वहां की विधानसभा की कार्यप्रणाली सहित राज्य में चल रहे कार्यों का भी करना था। इसके लिए मध्यप्रदेश विधानसभा ने उत्तराखण्ड विधानसभा सचिवालय को पत्र लिखा। उत्तराखण्ड विधानसभा सचिवालय ने प्रदेश के हालातों से अवगत कराते हुए जबाव भेजा कि यहां मौसम अनुकूल नहीं है। अधिक बारिश होने से कई शहरों का सड़क संपर्क टूट चुका है। मध्यप्रदेश विधानसभा को यह सूचना फैक्स संदेश के माध्यम से मिली। इस सूचना के साथ ही कल समिति का दौरा स्थगित किए जाने की सूचना सभी सदस्यों को भेज दी गई। मालूम हो समिति को अगले माह दौरे पर जाना था। इसी प्रकार आश्वासन समिति ने उत्तराखण्ड, हिमाचल राज्यों का दौरा कार्यक्रम तैयार किया। इन राज्यों की विधानसभा सचिवालय द्वारा बारिश के कारण वहां बने हालातों से मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय को अवगत कराया तो इस समिति ने भी दौरा निरस्त कर दिया। 

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भ्रष्टों को बेनकाब करेंगे आईएएस थेटे

सरकार में उपेक्षित महसूस कर रहे आईएएस अधिकारी रमेश थेटे अब खुलकर सामने आ गए हैं। वे कहते हैं कि प्रशासनिक सेवा में रहते हुए ही भ्रष्टों के चेहरों से नकाब उठाएंगे। लोकायुक्त पीपी नावलेकर पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए थेटे ने कहा कि अब वे लोकायुक्त सहित संगठन से जुड़े अन्य अफसरों की काली कमाई उजागर करेंगे। आयकर और सीबीआई को प्रमाणों के साथ इनके दस्तावेज सौंपे जाएंगे।
‘प्रदेश टुडे’ से चर्चा करते हुए थेटे ने बताया कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कई बार पत्र लिखने, व्यक्तिगत मुलाकात कर अपनी कहने का प्रयास किया गया लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए। उप सचिव स्तर के अधिकारी थेटे का दर्द यह है कि उनसे जूनियर अफसर सचिव स्तर तक प्रमोशन पा गए लेकिन उन्हें प्रमोशन नहीं दिया गया। बार-बार आग्रह किए जाने के बाद कलेक्टरी नहीं मिली। वे आरोप लगाते हैं दलित होने के कारण मुझे प्रताड़ना मिल रही है। एक सवाल पर वे कहते हैं भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार में रहकर ही लड़ाई लड़ता रहंूंगा, इसके लिए न बाबा रामदेव और न ही अन्ना हजारे के साथ जाएंगे। नौकरी छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता।
भ्रष्ट हैं लोकायुक्त नावलेकर -
उज्जैन अपर आयुक्त थेटे ने कल बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए लोकायुक्त जस्टिस पीपी नावलेकर को भ्रष्ट बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश कैडर के कई सवर्ण आईएएस अधिकारियों पर अवैध संपत्ति व पद का दुरुपयोग कर शासन को करोड़ों रुपए की क्षति पहुंचाने के आरोप लगे हैं, लेकिन लोकायुक्त संगठन ने ऐसे अफसरों के खिलाफ चालान पेश करने से पहले अभियोजन की स्वीकृति मांगी, लेकिन मेरे मामले में अभियोजन स्वीकृति के बिना ही चालान पेश कर दिया गया।
थेटे की फाइल तैयार -
मध्यप्रदेश कॉडर में 1993 बैच के आईएएस अधिकारी रमेश थेटे द्वारा सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी किए जाने को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। सरकार ने इसे सर्विस रूल्स के खिलाफ मानते हुए उनके खिलाफ कार्यवाही की तैयारी की है। संभव है एक-दो दिन में उनके खिलाफ कोई एक्शन हो जाए।

6:54 AM - No comments

डिफाल्टरों में नाम आने से आईएएस खफा


केन्द्र सरकार को अपनी अचल सम्पत्ति का ब्यौरा न देने पर देश के 127 डिफाल्टर आईएएस अफसरों की सूची में प्रदेश के 32 आईएएस अफसरों का नाम आने पर अफसरों ने आपत्ति दर्ज कराना शुरू कर दी है। वे इस बात पर आश्चर्य भी प्रकट कर रहे हैं जब निर्धारित समय पर उन्होंने ब्यौरा दे दिया है तो उनका नाम डिफाल्टरों की सूची में कैसे आ गया। अब राज्य सरकार भी अफसरों का रिकार्ड दुरुस्त खंगालने में जुटी है।
केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय ने प्रदेश के जिन आईएएस अफसरों को डिफाल्टरों की सूची में शामिल किया है, उसमें एसीएस स्तर के अफसरों से लेकर प्रमुख सचिव, सचिव और उनसे जूनियर अफसर भी शामिल हैं। राज्य सरकार भी मान रही है कि प्रदेश के सभी आईएएस अफसरों ने अचल सम्पत्ति का ब्यौरा दे दिया है, लेकिन कुछ अफसरों के ब्यौरे में कमियां हैं, दी गई जानकारी का परीक्षण चल रहा है, इसलिए इनकी जानकारी केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय को नहीं दी गई है। आधी अधूरी जानकारी केन्द्र को दी जाना भी उचित नहीं है, ऐसे में जैसे-जैसे आपत्तियों का निराकरण होता जा रहा है वैसे-वैसे केन्द्र को इसकी सूचना भेजी जा रही है। प्रदेश के 32 आईएएस अफसरों के नाम प्रकाश में आने से अधिकांश अफसरों ने मंत्रालय में संपर्क साधते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई। कल सोमवार और की तरह आज मंगलवार को भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही। कई आईएएस अफसरों ने दोबारा अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा मंत्रालय को उपलब्ध कराया, वे सरकारी ढर्रा के शिकार नहीं होना चाहते। उनका तर्क है कि जिन्होंने जैसी जानकारी दी है, वैसी ही जानकारी केन्द्र को उपलब्ध करा दी जाए, यदि कुछ त्रुटियां या आपत्ति है तो इसका निराकरण होता रहेगा।

6:53 AM - No comments

विधायकों को नहीं मिलेगा बहाली दिन का भत्ता


कांग्रेस विधायकों चौधरी राकेश सिंह चुतुर्वेदी और कल्पना पारुलेकर को चुनाव आयोग से भी अच्छी खबर मिली, आयोग ने उन्हें विधायक मानते हुए दोनों विधायकों के विधानसभा सीटों को अब भरा हुआ मान लिया। मालूम हो पहले आयोग ने इनकी सीटों को रिक्त घोषित कर दिया था। लेकिन इन्हें एक दिन का भत्ता नहीं मिलेगा।
कांग्रेस के दोनों विधायकों कल्पना पारुलेकर और चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को 18 जुलाई को बर्खास्त किया गया था। 27 जुलाई को बुलाए गए विशेष सत्र में 18 जुलाई के निर्णय को शून्य घोषित कर दिया गया। यानी ये लगातार विधायक माने जाएंगे। लेकिन 27 तारीख को बुलाए गए विशेष सत्र के दौरान इन्हें अनुपस्थित माना जाएगा, इन्हें इस दिन का भत्ता नहीं मिलेगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि विशेष सत्र के दौरान इनकी सदस्यता समाप्त थी, इसलिए ये सदन में मौजूद नहीं रहे। यह बात अलग है कि ये विधानसभा परिसर में मौजूद रहकर सदन की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए थे।

6:40 AM - No comments

नौकरशाहों पर असमंजस में सरकार


सूबे के आधा दर्जन आईएएस अफसर ऐसे हैं जिनके मामले में असमंजस की स्थिति है। इसमें से ज्यादातर मध्यप्रदेश में सेवाएं देने के मूड में नहीं है, जबकि कुछ मनमर्जी से काम कर रहे हैं। गेंद सरकार के पाले में है, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
प्रदेश में आईएएस अफसरों का टोटा होने के कारण राज्य सरकार चाहती है कि अफसर यहीं काम करें, इसलिए कॉडर परिवर्तन की हरीझंडी मिलने के बाद भी सरकार इन्हें रिलीव नहीं कर रही है, जबकि कुछ के मामले केन्द्र में लंबित हैं। प्रदेश में तेजी से बदल रहे राजनैतिक घटनाक्रम के चलते इन अफसरों की फाइल भी ठण्डे बस्ते है।
मधुरानी तेवतिया -
आईपीएस पति की मौत के बाद प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाया। असुरक्षित महसूस कर रहीं श्रीमति तेवतिया ने मध्यप्रदेश में नौकरी न करने का निर्णय लिया। राज्य सरकार से आग्रह किया कि उनका कॉडर बदलकर उत्तर प्रदेश किया जाए। प्रदेश सरकार अपनी अनुशंसा के साथ केन्द्र सरकार को फाइल केन्द्र सरकार को भेज चुकी है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।
ई रमेश कुमार -
सागर कलेक्टर हैं। मध्यप्रदेश छोड़कर आंध्र प्रदेश में सेवाएं देने की इच्छा व्यक्त की। केन्द्र सरकार ने इनके आग्रह को मानते हुए इन्हें हरीझंडी दिखा दी। केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय इस संबंध में दो माह पूर्व आदेश भी जारी कर चुका है, लेकिन अभी तक राज्य सरकार ने इन्हें रिलीव नहीं किया है। तर्क दिया जा रहा है कि अब इनका मूड बदल गया है, अब ये मध्यप्रदेश में ही सेवाएं देने के इच्छुक हैं। इन्हीं के आग्रह पर ही राज्य सरकार ने इन्हें रिलीव न करने का निर्णय लिया है।
सोनाली वायंगणकर -
मध्यप्रदेश को छोड़कर महाराष्ट्र राज्य में सेवाएं देना चाहती हैं। इसके लिए पारिवारिक कारण बताते हुए राज्य सरकार से आग्रह कर चुकी हैं। आग्रह किए जाने के दौरान ये शाजापुर कलेक्टर थीं, वहां से बुला लिया गया है, लेकिन इनके मामले में अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
ज्ञानेश्वर पाटिल -
श्योपुर कलेक्टर हैं। महाराष्ट्र राज्य में सेवाएं देना चाहते हैं। राज्य सरकार कॉडर बदलने के लिए प्रदेश सरकार को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन राज्य सरकार इन्हें मध्यप्रदेश में ही रखना चाहती है। भोपाल जिला पंचायत सीईओ रहते हुए चर्चा में आए। श्योपुर में भी ये सुर्खियों में हैं।

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केन्द्र पर टिका आईएएस यादव का भविष्य


नाफरमान आईएएस अनिल यादव का भविष्य अब केन्द्र सरकार पर टिका है, इन्हें नाफरमानी की सजा मिलना है। राज्य को केन्द्र के आदेश की प्रतीक्षा है।
मध्यप्रदेश कॉडर में 1999 बैच के आईएएस अफसर अनिल यादव 25 जुलाई 2007 से 24 जुलाई 2009 तक के लिए अध्ययन अवकाश पर विदेश गए थे। अवकाश अवधि समाप्त होने के बाद न तो वापस लौटे और न ही इन्होंने कोई सूचना दी। जब ये चार साल तक नहीं लौटे तो सरकार सक्रिय हुई और इनकी तलाश शुरू की गई। प्रदेश सरकार ने इसे नाफरमानी मानते हुए इनके निवास पर पत्र भेजे गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया। आखिरकार राज्य सरकार गायब हुए अफसर के बारे में केंद्र को सूचना भेजते हुए वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया। इस बीच यादव ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखा जिसमें यह बताने का प्रयास किया कि वे गायब नहीं हैं बल्कि लौट रहे हैं। राज्य सरकार उनके तर्क से सहमत नहीं है। सरकार को इनके पत्र तो मिल रहे हैं, लेकिन इन्होंने अपनी आमद नहीं दी। अब राज्य सरकार केन्द्र सरकार के मार्गदर्शन का इंतजार कर रही है।
असमंजस में सरकार -
आईएएस यादव ने राज्य सरकार को अपनी अचल सम्पत्ति की जानकारी भी भेजी है, अब सरकार यह नहीं समझ पा रही है कि इसे रिकार्ड में लिया जाए नहीं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि राज्य को अभी केन्द्र की तरफ से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं कि इनके मामले में क्या करना है।

6:40 AM - No comments

7 अन्य विधायकों को भी मिलेगी माफी


कांग्रेस के दो विधायकों चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और कल्पना पारुलेकर की सदस्यता बहाली के लिए बुलाए जा रहे विधानसभा के विशेष सत्र के साथ ही 7 अन्य विधायकों के मामले में गंभीरता से विचार शुरू है। विशेषाधिकार समिति इन विधायकों से अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी कर चुकी है। हालांकि अभी तक विधायकों की ओर से कोई जबाव नहीं आया है। विधायकों की ओर से जबाव आने के बाद समिति इनके मामले में फैसला लेगी।
हाल ही में समाप्त हुए मानसून सत्र के दौरान के दौरान भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा कराए जाने को लेकर सत्ता और विपक्षी दल के सदस्यों में तीखी नोकझोंक हुई। सदन में चर्चा न कराए जाने से नाराज कांग्रेस विधायकों ने 17 तारीख को तो स्पीकर के कक्ष के बाहर धरना दे दिया, जिसके कारण स्पीकर कक्ष से बाहर ही नहीं आ पाए। सदन में भी अजीब स्थिति बनी। कांग्रेस के सदस्य आसंदी के इर्दगिर्द पहुंच गए। इस कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई। गतिरोध के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करना पड़ी। सदन में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्यों की कार्यप्रणाली पर सत्तारूढ़ दल भाजपा के अनूप मिश्रा, सुदर्शन गुप्ता, तारचंद बाबरिया, शरद जैन एवं अन्य सदस्यों ने विशेषाधिकार भंग की सूचना दी थी।
ये हैं आरोपी विधायक -
स्पीकर ईश्वरदास रोहाणी ने कांग्रेस विधायक लाखन सिंह यादव, राम निवास रावत, पुरुषोत्तम दांगी, विजेन्द्र सिंह मालाहेड़ा, आरिफ अकील, नारायण सिंह प्रजापति, श्रीमती इमरती देवी को विशेषाधिकार भंग का आरोपी मानते हुए मामला विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया। मामला कमेटी के विचारार्थ है।

6:39 AM - No comments

नहीं खुल सकी आईएएस राजौरा की फाइल


मध्यप्रदेश कॉडर में 1990 बैच के आईएएस अफसर राजेश राजौरा की फाइल खुलने का रास्ता साफ होने के बाद भी सरकार ऐसा नहीं कर पा रही है। लम्बे समय से निलंबन का बोझ झेल रहे राजौरा भी चाहते हैं कि उनके मामले में सरकार शीघ्र निर्णय ले, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।
गृह सचिव रहते हुए करीब तीन वर्ष पूर्व आयकर छापे के दौरान इनके यहां आय से अधिक सम्पत्ति और करोड़ों रुपए की अचल सम्पत्ति के दस्तावेज मिलने के बाद से राज्य सरकार ने इन्हें निलंबित कर दिया था।

Friday, July 20, 2012

9:31 PM - No comments

विधानसभा : छोटों पर गाज, बड़े सुरक्षित

विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांगे्रस द्वारा किए गए हंगामे और उनके आसंदी तक पहुंच जाने के मामले में विधानसभा सचिवालय ने इसे सुरक्षा में चूक माना है। इसके लिए सुरक्षा से जुड़े चार लोगों को निलंबित करते हुए पांच से स्पष्टीकरण मांगा गया है। सचिवालय की इस कार्रवाई से असंतोष भी दिखने लगा है। इसका प्रमुख कारण छोटों पर गाज और बड़ों पर आंच न आना माना जा रहा है।
मामला 17 जुलाई की घटना से जुड़ा है। इस दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्य स्पीकर के कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए, इस कारण न तो स्पीकर सदन में पहुंच सके और न ही राजदण्ड सदन में ले जाया गया। सदन की बात की जाए तो यहां कांग्रेसी विधायक सभापति की आसंदी के पास जा पहुंचे। हालांकि इस घटना के बाद कांग्रेस के दो विधायकों चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और कल्पना पारुलेकर की सदस्यता समाप्त की जाकर आधा दर्जन विधायकों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला बना है। अब सभी की नजर यहां की सुरक्षा पर थी, कि मार्शलों के होते हुए आसंदी तक विधायक कैसे पहुंच गए।
11 लोग आए लपेटे में -
सहायक संचालक सुरक्षा सतीश कुमार पाण्डे, मार्शल कमलेश सिंह, सहायक मार्शल शिवाकांत दुबे, सुरक्षा गार्ड सुरेश मिश्रा को कर्त्तव्य में लापरवाही के कारण निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा वाचस्पति मिश्रा मार्शल, सहित सहायक मार्शलों में प्रदीप पाण्डे, विश्वनाथ चर्मकार, अरविन्द शर्मा, नारायण गौतम, रावेन्द्र पाण्डे और वंदना अंवाडकर सुरक्षा गार्ड को कारण बताओ नोटिस दिया गया है।
जिम्मेदारी तय नहीं -
सचिवालय ने चार को निलंबित किए जाने के साथ सात लोगों से स्पष्टीकरण तो मांगा है, लेकिन अभी तक अन्य वरिष्ठों की जिम्मेदारी तय नहीं की है। मालूम हो अरविन्द रघुवंशी सुरक्षा संचालक हैं, जेके शर्मा उप संचालक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सतीश भार्गव चीफ मार्शल हैं।
अधिकारी बोले -
प्रारंभिक तौर पर जिनकी गलती नजर आई, उन पर कार्यवाही की गई है। मामले की जांच की जाएगी, यदि इसमें अन्य लोगों की लारपवाही सामने आएगी तो उनके खिलाफ भी कार्यवाही होगी।
राजकुमार पाण्डे, प्रमुख सचिव विधानसभा

9:30 PM - No comments

स्पीकर रोहाणी सेफ ...!

विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के प्रति अविश्वास प्रकट करते हुए विपक्षी सदस्यों ने भले ही सचिवालय को अविश्वास प्रस्ताव दिया हो, लेकिन स्पीकर के लिए यह राहत की बात है कि वे पूरी तरह सुरक्षित (सेफ) हैं।
राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सदन में सरकार को घेरने की हरसंभव कोशिश की। ये भ्रष्टाचार पर चर्चा कराए जाने को अड़े रहे। मानसून सत्र के पहले दिन यानी 16 जुलाई को जब मांग नहीं मानी गई तो 17 जुलाई को तो विपक्षी दल के सदस्यों ने स्पीकर के कक्ष के सामने धरना दे दिया। मुख्य विपक्षी दल ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रकट करते हुए विधानसभा के प्रमुख सचिव को अविश्वास प्रस्ताव भी दिया। चूंकि अविश्वास प्रस्ताव स्पीकर के खिलाफ है, इसलिए सचिवालय अभी भी माथापच्ची में जुटा है। नियमों को खंगाला जा रहा है, विधानसभा कार्यसंचालन नियमों को देखकर तो यही कहा जा रहा है कि स्पीकर रोहाणी की कुर्सी सुरक्षित है। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव अभी अमान्य नहीं किया गया है, सचिवालय कभी भी यह फाइल बंद कर सकता है।
यह है नियम -
विधानसभा कार्यसंचालन नियम के तहत विधानसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की सूचना 14 दिन पूर्व देना अनिवार्य है। यह भी देखना जरूरी है कि सूचना देने के बाद कार्रवाई के लिए 14 दिन शेष हैं या नहीं। स्पीकर के लिए यही नियम राहत का है क्योंकि मानसून सत्र मात्र 12 दिन का था, और इसमें 10 बैठकें होना थीं। सत्र की एक बैठक हो चुकी थी। यानी 14 दिन का समय ही नहीं था। सदन की कार्रवाई भी समय से पहले स्थगित हो गई। सचिवालय के एक जिम्मेदारी अधिकारी बताते हैं कि ऐसी परिस्थिति में अविश्वास प्रस्ताव स्वयं ही अमान्य हो जाएगा।
10 फीसदी सदस्यों की सहमति जरूरी -
विधानसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को मान्य किए जाने के मामले में सदन में मौजूद 10 फीसदी सदस्यों की सहमति जरूरी है। यानी 230 सदस्यों वाली विधानसभा के यदि 23 सदस्य सदन में अविश्वास के पक्ष में अपना वोट देते हैं तो प्रस्ताव मान्य हो जाता है, यानी जिसके खिलाफ प्रस्ताव लाया जाता है उसे कुर्सी छोड़ना होगी।

9:29 PM - No comments

निलंबित आईएएस कटेला बहाल

महिला से दुष्कृत्य किए जाने के आरोप में पांच साल से निलंबित चल रहे आईएएस अफसर वीके कटेला को राज्य सरकार ने बहाल कर दिया है। इन्हें संस्कृति विभाग का अपर सचिव पदस्थ किया गया है।
मामला 19 मार्च 1999 का है जब ये बिलासपुर जिला पंचायत में सीईओ थे। उस दौरान उनके अधीनस्थ आदिम जाति कल्याण विभाग की एक अधीक्षिका ने इनके ऊपर ज्यादती का आरोप लगाते हुए एक नवम्बर 2000 को अनुसूचित कल्याण थाने में ज्यादती की रिपोर्ट दर्ज कराई। न्यायालय में चालान पेश हुआ और गिरफ्तारी भी हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए इधर मध्यप्रदेश सरकार ने 15 अप्रेल 2007 में इन्हें निलंबित करते हुए विभागीय जांच भी शुरू कर दी। आरोप सिद्ध न होने के कारण हाईकोर्ट ने बरी कर दिया था। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि कटेला का निलंबन भी समाप्त हो जाएगा। 15 जुलाई को इनकी निलंबन अवधि समाप्त हो रही थी। अब सरकार ने भी इनको बहाल कर दिया है।
मंत्रालय में इनकी बदली जिम्मेदारी -
राज्य सरकार ने मंत्रालय स्तर पर एक दर्जन अफसरों की जिम्मेदारी भी बदली है। केदार शर्मा को अपर सचिव कृषि, विवेक जैन को अपर सचिव वाणिज्यिक कर, यूके सुबुद्धि को अपर सचिव वित्त, मूलचंद वर्मा को उप सचिव गृह, अजय शर्मा को उप सचिव गृह, अभय वर्मा को उप सचिव सामाजिक न्याय, अमर सिंह चंदेल को उप सचिव जीएडी, उषा परमार को उप सचिव जीएडी, संजीव श्रीवास्तव उप सचिव श्रम, एसएल अहिरवार को उप सचिव आवास एवं पर्यावरण पदस्थ किया गया है।

9:27 PM - No comments

दो घण्टे में निपट गई 10 दिवसीय बैठक

विधानसभा के 12 दिवसीय सत्र में कुल 10 बैठकें होना थीं, लेकिन सदन में सत्तापक्ष और विपक्षी दल के सदस्यों में तीखी तकरार, लगातार व्यवधान के चलते सदन की बैठकें तीन दिन में ही स्थगित कर दी गर्इं। तीन दिन भी सदन की कार्रवाई पूरे दिन नहीं चल सकी। विधानसभा सचिवालय द्वारा तैयार किए गए रिकार्ड पर नजर डाली जाए तो पहले दिन यानी 16 जुलाई को सदन की बैठक मात्र 32 मिनट की चल सकी। अगले दिन यानी 17 जुलाई को कार्रवाई शुरू होते ही हंगामा शुरू हो गया। विपक्षी दल के सदस्यों ने स्पीकर के चेम्बर के बाहर धरना दे दिया। इस कारण स्पीकर चेम्बर के बाहर ही नहीं सके। हालांकि सभापति आसंदी पर मौजूद रहे। उन्होंने सदन का संचालन किया। इस दिन एक घण्टे तक कार्रवाई चली। 18 जुलाई को भी सदन की कार्रवाई हंगामे की भेंट चढ़ गई। इस दिन मात्र 33 मिनट ही कार्रवाई चल सकी।

9:26 PM - No comments

3 साल में 190 करोड़ की काली कमाई जब्त

तीन साल में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ की गई छापे की कार्यवाही के दौरान 190 करोड़ रुपए से अधिक की काली कमाई जब्त की गई। विधायक तुलसी सिलावल के सवाल पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा में लिखित उत्तर में बताया कि लोकायुक्त संगठन द्वारा कुल 102 पंजीबद्ध प्रकरणों के अंतर्गत अधिकारी, कर्मचारियों के विरुद्ध छापे की कार्यवाही की गई। छापे की कार्यवाही में 190 करोड़ 51 लाख 45 हजार 152 रुपए जब्त किए गए। 6 प्रकरणों में न्यायालय में चालान पेश किया गया। 96 प्रकरण वर्तमान में जांच में लंबित हैं।

9:26 PM - No comments

पदोन्नति में जारी रहेगा आरक्षण

प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर मचे बवाल के बीच राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है आरक्षण जारी रहेगा। राज्य सरकार ने लोक सेवा आयोग को भी ऐसी ही जानकारी भेजी है। जिसमें आरक्षण जारी रखने की बात कही गई है।
भाजपा विधायक दीपक जोशी और ध्रुव नारायण सिंह को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिए विधानसभा में लिखित उत्तर में बताया कि सर्वोच्च न्यायालय की पीठ द्वारा अनेक राज्यों की याचिकाओं को एकजाई कर एम नागराज प्रकरण में 19 अक्टूबर 2006 को निर्णय पारित करते हुए निर्देश दिए हैं कि संबंधित राज्य को पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान करने से पूर्व पिछड़ापन, प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता, समग्र प्रशासनिक दक्षता प्रदर्शित होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने बताया किआदिम जाति तथा अनुसंधान विकास संस्थान द्वारा अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों का सामाजिक आर्थिक, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक पिछड़ापन की रिपोर्ट तैयार की गई। उन्होंने स्वीकार किया कि पदोन्नति में आरक्षण को समाप्त किए जाने के मामले में विभिन्न संगठनों के मांग पत्र भी प्राप्त हुए हैं। इस विषय पर महाधिवक्ता की राय ली गई, महाधिवक्ता द्वारा दिए गए अभिमत के अनुसार लोक सेवा आयोग को पदोन्नति में आरक्षण जारी रखने को कहा गया। आयोग को यह पत्र 26 जून 2012 को लिखा गया है।

Saturday, July 14, 2012

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अरुणा के लिए अवकाश के दिन डीपीसी

 आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष अरुणा शर्मा को प्रमोशन देने के लिए शनिवार अवकाश के दिन विभागीय प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) की बैठक बुलाई गई। मालूम हो 1982 बैच के आईएएस अफसरों को एसीएस पद पर प्रमोशन मिलना है। इस बैच में श्रीमती शर्मा का नाम टॉप में है। डीपीसी पूरे बैच के लिए है, जैसे-जैसे पद रिक्त होते जाएंगे, वैसे-वैसे अफसरों का ओहदा बढ़ता जाएगा।
प्रदेश में एसीएस स्तर के अफसरों के दो पद रिक्त थे, हाल ही में स्नेहलता कुमार के केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटने के बाद एसीएस स्तर का एक पद रह गया है। चूंकि अरुणा शर्मा अपने बैच की सबसे सीनियर अफसर हैं, इसलिए इनको एसीएस पद पर प्रमोशन मिलना तय है।

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उत्तराखण्ड के लाटसाब को पुराने भोपाल की चिंता

उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी को पुराने भोपाल के विकास की चिंता सता रही है। लाट साहब की कुर्सी संभालने के बाद पहली बार भोपाल आए कुरैशी ने यहां मीडिया से चर्चा में कहा कि राज्य की शिवराज सिंह चौहान सरकार पुराने भोपाल के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने यह जरूर कहा कि उत्तराखण्ड घूमने आने वाले मध्यप्रदेश के लोगों का स्वागत वहां की सरकार करेगी।
सेंट्रल प्रेस क्लब द्वारा आयोजित प्रेस से मिलिए कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल कुरैशी ने कहा कि राज्य के चारों धाम (बद्रीनाथ, केदानाथ, यमोत्री, गंगोत्री) पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को हर संभव प्रयास किया जाएगा। प्रयास होगा कि चारों धाम के लिए प्राधिकरण गठित हो। वे बताते हैं कि उन्होंने अभी बद्रीनाथ की यात्रा की है, अन्य तीर्थों में भी जाएंगे। क्या राज्यपाल रबर स्टाम्प की तरह काम करने के सवाल पर उन्होंने यही कहा राज्यपाल के पास असीम शक्तियां हैं, पद की गरिमा को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए। राज्यपाल पद की जिम्मेदारी के बाद क्या फिर से सक्रिय राजनीति में आएंगे, इस पर कुरैशी ने यही कहा कि राज्यपाल का कार्यकाल तो पूरा कर लेने दो।

10:31 PM - No comments

नौकरशाहों का चुनावी वर्ष में प्रदेश से तौबा


 प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा के आम चुनाव होना है ऐसे में केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अफसरों ने प्रदेश से तौबा करना शुरू कर दिया है। वे चुनाव तक मध्यप्रदेश नहीं लौटना चाहते।

प्रदेश के ऐसे आईएएस अफसरों की संख्या अच्छी खासी है जो प्रतिनियुक्ति पर गए तो प्रदेश लौटे ही नहीं, बल्कि समय-समय पर वे अपना कार्यकाल बढ़वाने में सफल रहे। अब इनमें अमर सिंह का नाम भी जुड़ गया है। मध्यप्रदेश कॉडर में 1981 बैच के आईएएस अफसर अमर सिंह वर्ष 2004 में केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए थे। कांग्रेस सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पसंदीदा अफसरों में शुमार अमर सिंह ने प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की तैयारी कर ली थी। इन्हें सफलता मिली 7 अक्टूबर 2004 को। इस तिथि को वे केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए। तभी से ये प्रतिनियुक्ति पर ही हैं। हालांकि इनकी प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने पर इनकी प्रदेश वापसी की अटकलें शुरू हो गर्इं थीं, लेकिन ये वापस नहीं लौटे। बताया जाता है कि केन्द्र सरकार ने इनकी प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ा दी है। अब ये अपना कार्यकाल पूरा होने या फिर सेवानिवृत्ति तक केन्द्र सरकार में सेवाएं दे सकते हैं। मालूम हो इनका कार्यकाल मई 2013 तक है।
इसी प्रकार वरिष्ठ अधिकारी पद्मवीर सिंह ने भी अपनी प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़वाने में सफलता हासिल की। मध्यप्रदेश कॉडर में 1977 बैच के आईएएस अधिकारी सिंह लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी मसूरी में महानिदेशक हैं। इनकी प्रतिनियुक्ति अवधि एक जून 2012 से फरवरी 2014 तक के लिए बढ़ी है। इसी तिथि में ये सेवानिवृत्त भी हो जाएंगे। यहां यह बताना जरूरी है कि अवनि वैश्य के सेवानिवृत्त होने के पहले जब प्रदेश में नए चीफ सेके्रटरी की तलाश चल रही थी तब इनके नाम पर भी गंभीरता से विचार हुआ था, लेकिन बात नहीं बनी।
लम्बे समय बाद केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस लौटीं अमिता शर्मा ने चंद दिनों मध्यप्रदेश में सेवाएं दीं और दिल्ली के मध्यप्रदेश भवन में अपनी पोस्टिंग करवाने में सफलता हासिल की। अब इन्होंने फिर से केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की तैयारी कर ली है। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय में एडीशन सेके्रटरी की जिम्मेदारी मिलने जा रही है। इस संबंध में प्रदेश सरकार की हरीझंडी मिलना शेष है। यहां से रिलीव होते ही ये नई जिम्मेदारी संभाल लेंगीं।

विजय श्रीवास्तव भी जाने को तैयार -
सामान्य प्रशासन विभाग (कार्मिक) की प्रमुख सचिव विजया श्रीवास्तव भी प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली जाने की तैयारी में हैं। राज्य सरकार ने हरीझंडी दिखा दी है। अब इन्हें केन्द्र सरकार से पदस्थापना आदेश का इंतजार है।

8 माह में ही मोह भंग -
लम्बे समय तक केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहे वरिष्ठ आईएएस अफसर रामानुजम की प्रदेश में वापसी होते ही राज्य सरकार ने इन्हें खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण विभाग की कमान सौंपी। अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अफसर रामानुजम का 8 माह में प्रदेश से मोह भंग हो गया और इन्होंने केन्द्र की राह पकड़ ली। 1979 बैच के आईएएस अफसर रामानुजम प्रधानमंत्री कार्यालय में सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि इसके पहले भी वे प्रधानमंत्री कार्यालय में सेवाएं दे चुके हैं, उनके पुराने अनुभवों को देखते हुए उन्हें दोबारा पीएमओ में जिम्मेदारी मिली।