Monday, August 27, 2012

6:54 AM - No comments

डिफाल्टरों में नाम आने से आईएएस खफा


केन्द्र सरकार को अपनी अचल सम्पत्ति का ब्यौरा न देने पर देश के 127 डिफाल्टर आईएएस अफसरों की सूची में प्रदेश के 32 आईएएस अफसरों का नाम आने पर अफसरों ने आपत्ति दर्ज कराना शुरू कर दी है। वे इस बात पर आश्चर्य भी प्रकट कर रहे हैं जब निर्धारित समय पर उन्होंने ब्यौरा दे दिया है तो उनका नाम डिफाल्टरों की सूची में कैसे आ गया। अब राज्य सरकार भी अफसरों का रिकार्ड दुरुस्त खंगालने में जुटी है।
केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय ने प्रदेश के जिन आईएएस अफसरों को डिफाल्टरों की सूची में शामिल किया है, उसमें एसीएस स्तर के अफसरों से लेकर प्रमुख सचिव, सचिव और उनसे जूनियर अफसर भी शामिल हैं। राज्य सरकार भी मान रही है कि प्रदेश के सभी आईएएस अफसरों ने अचल सम्पत्ति का ब्यौरा दे दिया है, लेकिन कुछ अफसरों के ब्यौरे में कमियां हैं, दी गई जानकारी का परीक्षण चल रहा है, इसलिए इनकी जानकारी केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय को नहीं दी गई है। आधी अधूरी जानकारी केन्द्र को दी जाना भी उचित नहीं है, ऐसे में जैसे-जैसे आपत्तियों का निराकरण होता जा रहा है वैसे-वैसे केन्द्र को इसकी सूचना भेजी जा रही है। प्रदेश के 32 आईएएस अफसरों के नाम प्रकाश में आने से अधिकांश अफसरों ने मंत्रालय में संपर्क साधते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई। कल सोमवार और की तरह आज मंगलवार को भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही। कई आईएएस अफसरों ने दोबारा अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा मंत्रालय को उपलब्ध कराया, वे सरकारी ढर्रा के शिकार नहीं होना चाहते। उनका तर्क है कि जिन्होंने जैसी जानकारी दी है, वैसी ही जानकारी केन्द्र को उपलब्ध करा दी जाए, यदि कुछ त्रुटियां या आपत्ति है तो इसका निराकरण होता रहेगा।

6:53 AM - No comments

विधायकों को नहीं मिलेगा बहाली दिन का भत्ता


कांग्रेस विधायकों चौधरी राकेश सिंह चुतुर्वेदी और कल्पना पारुलेकर को चुनाव आयोग से भी अच्छी खबर मिली, आयोग ने उन्हें विधायक मानते हुए दोनों विधायकों के विधानसभा सीटों को अब भरा हुआ मान लिया। मालूम हो पहले आयोग ने इनकी सीटों को रिक्त घोषित कर दिया था। लेकिन इन्हें एक दिन का भत्ता नहीं मिलेगा।
कांग्रेस के दोनों विधायकों कल्पना पारुलेकर और चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को 18 जुलाई को बर्खास्त किया गया था। 27 जुलाई को बुलाए गए विशेष सत्र में 18 जुलाई के निर्णय को शून्य घोषित कर दिया गया। यानी ये लगातार विधायक माने जाएंगे। लेकिन 27 तारीख को बुलाए गए विशेष सत्र के दौरान इन्हें अनुपस्थित माना जाएगा, इन्हें इस दिन का भत्ता नहीं मिलेगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि विशेष सत्र के दौरान इनकी सदस्यता समाप्त थी, इसलिए ये सदन में मौजूद नहीं रहे। यह बात अलग है कि ये विधानसभा परिसर में मौजूद रहकर सदन की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए थे।

6:40 AM - No comments

नौकरशाहों पर असमंजस में सरकार


सूबे के आधा दर्जन आईएएस अफसर ऐसे हैं जिनके मामले में असमंजस की स्थिति है। इसमें से ज्यादातर मध्यप्रदेश में सेवाएं देने के मूड में नहीं है, जबकि कुछ मनमर्जी से काम कर रहे हैं। गेंद सरकार के पाले में है, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
प्रदेश में आईएएस अफसरों का टोटा होने के कारण राज्य सरकार चाहती है कि अफसर यहीं काम करें, इसलिए कॉडर परिवर्तन की हरीझंडी मिलने के बाद भी सरकार इन्हें रिलीव नहीं कर रही है, जबकि कुछ के मामले केन्द्र में लंबित हैं। प्रदेश में तेजी से बदल रहे राजनैतिक घटनाक्रम के चलते इन अफसरों की फाइल भी ठण्डे बस्ते है।
मधुरानी तेवतिया -
आईपीएस पति की मौत के बाद प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाया। असुरक्षित महसूस कर रहीं श्रीमति तेवतिया ने मध्यप्रदेश में नौकरी न करने का निर्णय लिया। राज्य सरकार से आग्रह किया कि उनका कॉडर बदलकर उत्तर प्रदेश किया जाए। प्रदेश सरकार अपनी अनुशंसा के साथ केन्द्र सरकार को फाइल केन्द्र सरकार को भेज चुकी है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।
ई रमेश कुमार -
सागर कलेक्टर हैं। मध्यप्रदेश छोड़कर आंध्र प्रदेश में सेवाएं देने की इच्छा व्यक्त की। केन्द्र सरकार ने इनके आग्रह को मानते हुए इन्हें हरीझंडी दिखा दी। केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय इस संबंध में दो माह पूर्व आदेश भी जारी कर चुका है, लेकिन अभी तक राज्य सरकार ने इन्हें रिलीव नहीं किया है। तर्क दिया जा रहा है कि अब इनका मूड बदल गया है, अब ये मध्यप्रदेश में ही सेवाएं देने के इच्छुक हैं। इन्हीं के आग्रह पर ही राज्य सरकार ने इन्हें रिलीव न करने का निर्णय लिया है।
सोनाली वायंगणकर -
मध्यप्रदेश को छोड़कर महाराष्ट्र राज्य में सेवाएं देना चाहती हैं। इसके लिए पारिवारिक कारण बताते हुए राज्य सरकार से आग्रह कर चुकी हैं। आग्रह किए जाने के दौरान ये शाजापुर कलेक्टर थीं, वहां से बुला लिया गया है, लेकिन इनके मामले में अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
ज्ञानेश्वर पाटिल -
श्योपुर कलेक्टर हैं। महाराष्ट्र राज्य में सेवाएं देना चाहते हैं। राज्य सरकार कॉडर बदलने के लिए प्रदेश सरकार को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन राज्य सरकार इन्हें मध्यप्रदेश में ही रखना चाहती है। भोपाल जिला पंचायत सीईओ रहते हुए चर्चा में आए। श्योपुर में भी ये सुर्खियों में हैं।

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केन्द्र पर टिका आईएएस यादव का भविष्य


नाफरमान आईएएस अनिल यादव का भविष्य अब केन्द्र सरकार पर टिका है, इन्हें नाफरमानी की सजा मिलना है। राज्य को केन्द्र के आदेश की प्रतीक्षा है।
मध्यप्रदेश कॉडर में 1999 बैच के आईएएस अफसर अनिल यादव 25 जुलाई 2007 से 24 जुलाई 2009 तक के लिए अध्ययन अवकाश पर विदेश गए थे। अवकाश अवधि समाप्त होने के बाद न तो वापस लौटे और न ही इन्होंने कोई सूचना दी। जब ये चार साल तक नहीं लौटे तो सरकार सक्रिय हुई और इनकी तलाश शुरू की गई। प्रदेश सरकार ने इसे नाफरमानी मानते हुए इनके निवास पर पत्र भेजे गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया। आखिरकार राज्य सरकार गायब हुए अफसर के बारे में केंद्र को सूचना भेजते हुए वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया। इस बीच यादव ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखा जिसमें यह बताने का प्रयास किया कि वे गायब नहीं हैं बल्कि लौट रहे हैं। राज्य सरकार उनके तर्क से सहमत नहीं है। सरकार को इनके पत्र तो मिल रहे हैं, लेकिन इन्होंने अपनी आमद नहीं दी। अब राज्य सरकार केन्द्र सरकार के मार्गदर्शन का इंतजार कर रही है।
असमंजस में सरकार -
आईएएस यादव ने राज्य सरकार को अपनी अचल सम्पत्ति की जानकारी भी भेजी है, अब सरकार यह नहीं समझ पा रही है कि इसे रिकार्ड में लिया जाए नहीं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि राज्य को अभी केन्द्र की तरफ से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं कि इनके मामले में क्या करना है।

6:40 AM - No comments

7 अन्य विधायकों को भी मिलेगी माफी


कांग्रेस के दो विधायकों चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और कल्पना पारुलेकर की सदस्यता बहाली के लिए बुलाए जा रहे विधानसभा के विशेष सत्र के साथ ही 7 अन्य विधायकों के मामले में गंभीरता से विचार शुरू है। विशेषाधिकार समिति इन विधायकों से अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी कर चुकी है। हालांकि अभी तक विधायकों की ओर से कोई जबाव नहीं आया है। विधायकों की ओर से जबाव आने के बाद समिति इनके मामले में फैसला लेगी।
हाल ही में समाप्त हुए मानसून सत्र के दौरान के दौरान भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा कराए जाने को लेकर सत्ता और विपक्षी दल के सदस्यों में तीखी नोकझोंक हुई। सदन में चर्चा न कराए जाने से नाराज कांग्रेस विधायकों ने 17 तारीख को तो स्पीकर के कक्ष के बाहर धरना दे दिया, जिसके कारण स्पीकर कक्ष से बाहर ही नहीं आ पाए। सदन में भी अजीब स्थिति बनी। कांग्रेस के सदस्य आसंदी के इर्दगिर्द पहुंच गए। इस कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई। गतिरोध के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करना पड़ी। सदन में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्यों की कार्यप्रणाली पर सत्तारूढ़ दल भाजपा के अनूप मिश्रा, सुदर्शन गुप्ता, तारचंद बाबरिया, शरद जैन एवं अन्य सदस्यों ने विशेषाधिकार भंग की सूचना दी थी।
ये हैं आरोपी विधायक -
स्पीकर ईश्वरदास रोहाणी ने कांग्रेस विधायक लाखन सिंह यादव, राम निवास रावत, पुरुषोत्तम दांगी, विजेन्द्र सिंह मालाहेड़ा, आरिफ अकील, नारायण सिंह प्रजापति, श्रीमती इमरती देवी को विशेषाधिकार भंग का आरोपी मानते हुए मामला विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया। मामला कमेटी के विचारार्थ है।

6:39 AM - No comments

नहीं खुल सकी आईएएस राजौरा की फाइल


मध्यप्रदेश कॉडर में 1990 बैच के आईएएस अफसर राजेश राजौरा की फाइल खुलने का रास्ता साफ होने के बाद भी सरकार ऐसा नहीं कर पा रही है। लम्बे समय से निलंबन का बोझ झेल रहे राजौरा भी चाहते हैं कि उनके मामले में सरकार शीघ्र निर्णय ले, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।
गृह सचिव रहते हुए करीब तीन वर्ष पूर्व आयकर छापे के दौरान इनके यहां आय से अधिक सम्पत्ति और करोड़ों रुपए की अचल सम्पत्ति के दस्तावेज मिलने के बाद से राज्य सरकार ने इन्हें निलंबित कर दिया था।

Friday, July 20, 2012

9:31 PM - No comments

विधानसभा : छोटों पर गाज, बड़े सुरक्षित

विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांगे्रस द्वारा किए गए हंगामे और उनके आसंदी तक पहुंच जाने के मामले में विधानसभा सचिवालय ने इसे सुरक्षा में चूक माना है। इसके लिए सुरक्षा से जुड़े चार लोगों को निलंबित करते हुए पांच से स्पष्टीकरण मांगा गया है। सचिवालय की इस कार्रवाई से असंतोष भी दिखने लगा है। इसका प्रमुख कारण छोटों पर गाज और बड़ों पर आंच न आना माना जा रहा है।
मामला 17 जुलाई की घटना से जुड़ा है। इस दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्य स्पीकर के कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए, इस कारण न तो स्पीकर सदन में पहुंच सके और न ही राजदण्ड सदन में ले जाया गया। सदन की बात की जाए तो यहां कांग्रेसी विधायक सभापति की आसंदी के पास जा पहुंचे। हालांकि इस घटना के बाद कांग्रेस के दो विधायकों चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और कल्पना पारुलेकर की सदस्यता समाप्त की जाकर आधा दर्जन विधायकों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला बना है। अब सभी की नजर यहां की सुरक्षा पर थी, कि मार्शलों के होते हुए आसंदी तक विधायक कैसे पहुंच गए।
11 लोग आए लपेटे में -
सहायक संचालक सुरक्षा सतीश कुमार पाण्डे, मार्शल कमलेश सिंह, सहायक मार्शल शिवाकांत दुबे, सुरक्षा गार्ड सुरेश मिश्रा को कर्त्तव्य में लापरवाही के कारण निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा वाचस्पति मिश्रा मार्शल, सहित सहायक मार्शलों में प्रदीप पाण्डे, विश्वनाथ चर्मकार, अरविन्द शर्मा, नारायण गौतम, रावेन्द्र पाण्डे और वंदना अंवाडकर सुरक्षा गार्ड को कारण बताओ नोटिस दिया गया है।
जिम्मेदारी तय नहीं -
सचिवालय ने चार को निलंबित किए जाने के साथ सात लोगों से स्पष्टीकरण तो मांगा है, लेकिन अभी तक अन्य वरिष्ठों की जिम्मेदारी तय नहीं की है। मालूम हो अरविन्द रघुवंशी सुरक्षा संचालक हैं, जेके शर्मा उप संचालक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सतीश भार्गव चीफ मार्शल हैं।
अधिकारी बोले -
प्रारंभिक तौर पर जिनकी गलती नजर आई, उन पर कार्यवाही की गई है। मामले की जांच की जाएगी, यदि इसमें अन्य लोगों की लारपवाही सामने आएगी तो उनके खिलाफ भी कार्यवाही होगी।
राजकुमार पाण्डे, प्रमुख सचिव विधानसभा